उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन, प्रदेशभर में शोक की लहर

देहरादून: उत्तराखंड के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन हो गया है। वह देहरादून स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती थे, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे उत्तराखंड समेत राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

भुवन चंद्र खंडूड़ी को उत्तराखंड की राजनीति में ईमानदार, अनुशासित और सख्त प्रशासक के तौर पर जाना जाता था। उन्होंने केंद्र से लेकर उत्तराखंड की राजनीति तक कई महत्वपूर्ण फैसले लिए और अपनी साफ-सुथरी छवि के कारण जनता के बीच विशेष पहचान बनाई।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त छवि

बीसी खंडूड़ी अपने पूरे राजनीतिक जीवन में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के लिए पहचाने जाते रहे। उन्होंने सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने और जवाबदेही तय करने के लिए कई सख्त कदम उठाए। किसी भी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करना उनकी प्रशासनिक शैली का हिस्सा माना जाता था।

लोकायुक्त विधेयक बना ऐतिहासिक फैसला

साल 2011 में उन्होंने उत्तराखंड में देश के सबसे सख्त लोकायुक्त कानूनों में से एक लागू करवाया। इस कानून के दायरे में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, आईएएस और आईपीएस अधिकारियों समेत सभी बड़े पद शामिल थे। भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त जांच और कार्रवाई के प्रावधानों के कारण यह फैसला देशभर में चर्चा का विषय बना था।

ई-गवर्नेंस और पारदर्शी व्यवस्था पर जोर

भुवन चंद्र खंडूड़ी ने प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता देते हुए ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया। उन्होंने फाइल प्रोसेसिंग को तेज करने, जन शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत बनाने और सरकारी कर्मचारियों की ट्रांसफर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए कई अहम सुधार किए।

सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में अहम योगदान

केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को नई गति दी। खासतौर पर गोल्डन क्वाड्रिलेटरल और नेशनल हाईवे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उत्तराखंड में भी उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया।

सैनिक पृष्ठभूमि का प्रशासन में दिखा असर

भुवन चंद्र खंडूड़ी भारतीय सेना में एक अनुशासित अधिकारी रहे थे। सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े। उनकी प्रशासनिक शैली में अनुशासन, समयपालन और जवाबदेही स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी। उन्होंने सरकारी खर्च में कटौती और योजनाओं में पारदर्शिता पर भी जोर दिया।

भुवन चंद्र खंडूड़ी का राजनीतिक सफर

भुवन चंद्र खंडूड़ी का जन्म 1 अक्टूबर 1934 को हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भारतीय सेना से की और एक अनुशासित सैन्य अधिकारी के रूप में पहचान बनाई। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वह राजनीति में सक्रिय हुए और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हो गए।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वह सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे। इस दौरान उन्होंने देश की सड़क परियोजनाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन से उत्तराखंड ने एक ऐसे नेता को खो दिया है, जिन्हें उनकी सादगी, ईमानदारी और कड़े प्रशासनिक फैसलों के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

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