देहरादून: पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत के लंबे समय बाद दिल्ली से उत्तराखंड लौटने पर प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है। देहरादून में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत करते हुए रोड शो निकाला, जिसके बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां कांग्रेस नेताओं ने इसे कार्यकर्ताओं के स्नेह और सम्मान का प्रतीक बताया, वहीं भाजपा ने इसे कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान से जोड़कर हमला बोला है।
प्रदेश कांग्रेस महासचिव नीरज त्यागी ने कहा कि हरीश रावत पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। ऐसे में करीब दो महीने बाद प्रदेश लौटने पर कार्यकर्ताओं ने उनका उत्साहपूर्वक स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संगठन में सभी नेताओं को केंद्रीय नेतृत्व की ओर से अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं और सभी नेता अपने दायित्वों का मजबूती से निर्वहन कर रहे हैं।
नीरज त्यागी ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं, जबकि हरक सिंह रावत चुनाव प्रबंधन समिति, प्रीतम सिंह चुनाव प्रचार समिति, करण माहरा चार्जशीट समिति और भुवन कापड़ी घोषणापत्र समिति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगठन किसी एक व्यक्ति से नहीं बल्कि सामूहिक नेतृत्व से मजबूत होता है और हरीश रावत के लंबे राजनीतिक अनुभव का लाभ कांग्रेस को निश्चित रूप से मिलेगा।
उन्होंने राजनीतिक चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदेश में आए दिन तरह-तरह की अटकलें लगती रहती हैं, लेकिन वास्तविक मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक, कानून व्यवस्था, बेरोजगारी और प्रदेश के विकास जैसे विषयों को प्रमुख बताया। त्यागी ने देहरादून में दिनदहाड़े गोलीबारी की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि आम लोगों की सुरक्षा एक बड़ा सवाल बन गई है।
उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड का भी जिक्र करते हुए कहा कि उनकी पुण्यतिथि पर एक बार फिर न्याय की मांग उठी है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के मुद्दे पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों पर व्यापक बहस और समाधान की आवश्यकता है।
वहीं हरीश रावत के रोड शो को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और वरिष्ठ विधायक विनोद चमोली ने कहा कि हरीश रावत का संघर्ष अब भाजपा से नहीं बल्कि कांग्रेस के भीतर की राजनीति से है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था हरीश रावत को राजनीतिक रूप से हाशिये पर धकेलने का प्रयास कर रही है।
विनोद चमोली ने कहा कि हरीश रावत का रोड शो उनकी राजनीतिक मौजूदगी दिखाने की कोशिश है। उन्होंने इसे कांग्रेस का आंतरिक विवाद बताते हुए दावा किया कि पार्टी के भीतर चल रही खींचतान का लाभ भाजपा को मिलेगा।
हरीश रावत के उत्तराखंड लौटने और उनके स्वागत में निकले रोड शो ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। कांग्रेस इसे कार्यकर्ताओं के सम्मान और संगठनात्मक मजबूती का प्रतीक बता रही है, जबकि भाजपा इसे कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति से जोड़कर देख रही है। आने वाले दिनों में यह सियासी बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।






