नैनीताल: उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UKSLSA) ने नैनीताल के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील चाइना पीक (नैना पीक) क्षेत्र में वन चौकी के भीतर संचालित हो रही कथित अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर गंभीर चिंता जताई है। प्राधिकरण के सदस्य-सचिव प्रदीप कुमार मणि (एचजेएस) ने इस मामले में प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) नैनीताल को पत्र भेजकर तत्काल जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, 14 जून 2026 को सदस्य-सचिव प्रदीप कुमार मणि नैना पीक क्षेत्र में ट्रेकिंग पर गए थे। इस दौरान उन्होंने वन चौकी परिसर में एक वन रक्षक को मैगी, पैकेज्ड पानी की बोतलें, कोल्ड ड्रिंक्स और बिस्कुट जैसी वस्तुएं बेचते हुए देखा। पूछताछ करने पर वन रक्षक ने दावा किया कि उसे इसके लिए विभागीय अनुमति प्राप्त है।
इस घटना के बाद उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने मामले का संज्ञान लेते हुए डीएफओ नैनीताल को पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि इस प्रकार की गतिविधियां न केवल वन विभाग की मूल जिम्मेदारियों के विपरीत हैं, बल्कि इससे संवेदनशील वन क्षेत्रों में प्लास्टिक और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे की समस्या भी बढ़ रही है।
प्राधिकरण ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि चाइना पीक क्षेत्र नैनीताल के सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक और पारिस्थितिक स्थलों में से एक है। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक और ट्रेकर्स पहुंचते हैं। ऐसे में वन चौकी परिसर में पैकेज्ड खाद्य सामग्री और पेय पदार्थों की बिक्री से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है तथा क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।
सदस्य-सचिव प्रदीप कुमार मणि ने डीएफओ से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने को कहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि यदि वन रक्षक को किसी प्रकार की अनुमति प्रदान की गई है तो उसका कानूनी आधार क्या है और क्या वह वन नियमों एवं पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप है। यदि ऐसी कोई अनुमति नहीं दी गई है, तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्राधिकरण ने वन विभाग को संवेदनशील वन क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की सलाह भी दी है, ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। पत्र की प्रतियां उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक (HoFF/PCCF) और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को भी भेजी गई हैं, जिससे मामले में आवश्यक स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
यह मामला सामने आने के बाद नैनीताल के पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर वन विभाग की जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।







