चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में 16 जून को कर्णप्रयाग में हुए विवाद के मामले में गिरफ्तार चारों निहंग सिखों को शुक्रवार (27 जून) को गोपेश्वर जिला न्यायालय से जमानत मिल गई है। हालांकि, मामले की सुनवाई अभी भी न्यायालय में जारी रहेगी और आगे की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी। चारों निहंगों की रिहाई की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से उत्तराखंड और हिमाचल सीमा पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी।
क्या है पूरा मामला?
16 जून को हेमकुंड साहिब के दर्शन कर लौट रहे निहंग सिखों का एक दल बाइक से वापस जा रहा था। इसी दौरान कर्णप्रयाग बाजार में किसी बात को लेकर स्थानीय व्यापारियों और निहंगों के बीच कहासुनी हो गई। देखते ही देखते विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। आरोप है कि इस दौरान कुछ निहंगों ने तलवार से हमला किया, जिसमें कई स्थानीय लोग घायल हो गए।
विरोध प्रदर्शन के बाद हुई थी गिरफ्तारी
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया था। विरोध स्वरूप बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाया गया और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की गई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार निहंग सिखों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। इस घटना के बाद से कर्णप्रयाग क्षेत्र में तनाव का माहौल बना रहा, जबकि सोशल मीडिया पर भी इस विवाद को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
उत्तराखंड कूच का किया था ऐलान
चारों निहंगों की गिरफ्तारी के विरोध में पंजाब के निहंगों ने 25 जून को उत्तराखंड कूच का ऐलान किया था। इसके तहत सैकड़ों निहंग पंजाब से उत्तराखंड की ओर रवाना हुए, लेकिन उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें देहरादून जिले में हिमाचल-उत्तराखंड सीमा स्थित कुल्हाल बैरियर पर रोक दिया। इस दौरान कुछ निहंगों ने बैरिकेडिंग तोड़कर उत्तराखंड में प्रवेश करने का प्रयास भी किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें समझाकर वापस भेज दिया।
दिया था अल्टीमेटम
निहंगों ने उत्तराखंड शासन और पुलिस-प्रशासन को चेतावनी दी थी कि यदि दो दिनों के भीतर जेल में बंद निहंगों को रिहा नहीं किया गया तो वे दोबारा उत्तराखंड कूच करेंगे। फिलहाल बड़ी संख्या में निहंग हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब गुरुद्वारे में रुके हुए हैं।
कोर्ट से मिली राहत, कानूनी प्रक्रिया जारी
इसी बीच शुक्रवार को गोपेश्वर जिला न्यायालय ने कर्णप्रयाग विवाद में गिरफ्तार चारों निहंग सिखों की जमानत मंजूर कर ली। हालांकि, अदालत में मामले की सुनवाई जारी रहेगी और आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की जाएगी। जमानत मिलने के बाद भी मुकदमे का निस्तारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।







