थराली/चमोली: चमोली जिले के थराली विकासखंड में एक प्रसूता महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) थराली में करीब पांच घंटे तक रखने के बाद हायर सेंटर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। मृतका की पहचान सरिता देवी (35), पत्नी नरेंद्र कुमार, निवासी कुराड़ गांव के रूप में हुई है। उनके पहले से दो बच्चे हैं।
सुबह अस्पताल पहुंची, दोपहर में किया गया रेफर
जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे सरिता देवी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली लेकर पहुंचे। आरोप है कि अस्पताल में कई घंटे तक उपचार के बाद भी उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद दोपहर करीब 2 बजे 108 एंबुलेंस के माध्यम से उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया।
बताया जा रहा है कि अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनोकोलॉजिस्ट) उपलब्ध नहीं था, जिसके चलते महिला को कर्णप्रयाग रेफर किया गया। हालांकि, कर्णप्रयाग पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप
घटना के बाद परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि महिला को समय रहते हायर सेंटर भेजा जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य भास्कर पांडे ने कहा कि महिला को सुबह अस्पताल लाया गया था, लेकिन कई घंटे बाद रेफर किया गया, जिससे समय पर उचित उपचार नहीं मिल सका। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पंचनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू
कोतवाली प्रभारी विनोद थपलियाल ने बताया कि मृतका के शव का पंचनामा भरने की कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद पोस्टमार्टम कराया जाएगा और शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दिया भरोसा
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि मामले को डॉ. अमित रुद्र द्वारा देखा गया था। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण महिला को हायर सेंटर रेफर किया गया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टरों की कमी फिर बनी बड़ा सवाल
इस घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों, विशेषकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का मुद्दा सामने ला दिया है। प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों के कई अस्पताल लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव से जूझ रहे हैं, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध होते, तो शायद एक और परिवार उजड़ने से बच सकता था।
फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या उपचार या रेफरल प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी।







