देहरादून पर फिर मंडरा रहा मानसून का खतरा: 10 महीने बाद भी अधूरे हैं पिछले साल की आपदा के जख्म, क्या इस बार तैयार है राजधानी?

देहरादून: सितंबर 2025 की आपदा ने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को ऐसा जख्म दिया, जिसे शहर आज भी पूरी तरह नहीं भूल पाया है। पहली बार ऐसा हुआ था जब भारी बारिश ने राजधानी को तीन प्रमुख दिशाओं से लगभग काट दिया था। कई अहम पुल टूट गए, सड़कें बह गईं और हजारों लोगों का संपर्क प्रभावित हो गया। अब, लगभग 10 महीने बाद एक और मानसून दस्तक दे चुका है, लेकिन सवाल यह है कि क्या देहरादून पिछली आपदा से सबक लेकर इस बार पूरी तरह तैयार है?

ईटीवी भारत ने उन सभी प्रमुख स्थानों का जायजा लिया, जहां पिछले वर्ष भारी तबाही हुई थी। तस्वीरें और जमीनी हकीकत बताती हैं कि कई महत्वपूर्ण पुनर्निर्माण कार्य अब भी अधूरे हैं।

सितंबर 2025 की आपदा बनी थी राजधानी के लिए ऐतिहासिक संकट

5 और 16 सितंबर 2025 को हुई मूसलाधार बारिश ने देहरादून में अभूतपूर्व तबाही मचाई थी। शहर के भीतर जलभराव और नुकसान के साथ-साथ राजधानी की तीनों प्रमुख दिशाओं से आने वाले संपर्क मार्ग भी एक साथ प्रभावित हो गए थे।

  • मसूरी रोड पर शिव मंदिर के पास पुल टूट गया।
  • प्रेमनगर के नंदा की चौकी पुल को भारी नुकसान पहुंचा।
  • हरिद्वार-देहरादून मार्ग पर लालतप्पड़ के पास सड़क बह गई।
  • मालदेवता मार्ग कई स्थानों पर पूरी तरह वॉशआउट हो गया।

इस स्थिति ने पहली बार राजधानी की यातायात व्यवस्था को लगभग ठप कर दिया था।

नंदा की चौकी पुल अब भी अधूरा

प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी पुल विकासनगर, हरबर्टपुर, पांवटा साहिब और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। आपदा के बाद इसके पुनर्निर्माण का काम शुरू हुआ, लेकिन करीब 10 महीने बाद भी निर्माण पूरा नहीं हो पाया है।

स्थानीय निवासी रूपेश नेगी का कहना है कि जिस गति से काम होना चाहिए था, वह नहीं हुआ। अब जबकि मानसून फिर सक्रिय हो गया है, लोगों को निर्माणाधीन पुल की सुरक्षा को लेकर चिंता सता रही है।

मसूरी रोड पर आज भी स्थायी पुल का इंतजार

देहरादून-मसूरी मार्ग प्रदेश के सबसे व्यस्त पर्यटन मार्गों में शामिल है। पिछले साल पुल टूटने के बाद यहां अस्थायी रूप से बेली ब्रिज लगाया गया था और जल्द स्थायी आरसीसी पुल बनाने का दावा किया गया था।

लेकिन लगभग 10 महीने बाद भी स्थायी पुल का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए यहां एक और बेली ब्रिज लगाकर अस्थायी व्यवस्था की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मार्ग केवल पर्यटन ही नहीं बल्कि स्थानीय लोगों, स्कूलों, संस्थानों और आपदा राहत के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

लालतप्पड़ पर अब भी अधूरी है चार लेन सड़क

हरिद्वार और ऋषिकेश से राजधानी में प्रवेश का सबसे व्यस्त मार्ग लालतप्पड़ भी अब तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है।

आपदा में क्षतिग्रस्त चार लेन सड़क का हिस्सा अभी भी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है। आज भी वाहनों को कई स्थानों पर दो लेन से एक लेन में होकर गुजरना पड़ता है, जिससे व्यस्त समय में लंबा जाम लग जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस मानसून में फिर भारी बारिश हुई तो यहां स्थिति और गंभीर हो सकती है।

मालदेवता मार्ग बहाल, लेकिन खतरा बरकरार

मालदेवता क्षेत्र में पिछले साल सड़क का बड़ा हिस्सा बह गया था। प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था कर यातायात तो शुरू कर दिया, लेकिन कई हिस्सों में सड़क अभी भी स्थायी रूप से विकसित नहीं हो सकी है।

कुछ स्थानों पर आज भी कच्ची सड़क है, जहां बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क टूटने का खतरा बना रहता है।

डीएम बोले—अधिकांश पुनर्निर्माण कार्य पूरे

देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान का कहना है कि पिछले वर्ष आपदा से प्रभावित अधिकांश क्षेत्रों में पुनर्निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है।

उन्होंने बताया कि कुछ स्थानों पर अभी भी काम जारी है, जिनका उन्होंने स्वयं निरीक्षण किया है।

“आगामी मानसून को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभाग अलर्ट मोड पर हैं। प्रेमनगर पुल सहित शेष कार्य भी जल्द पूरे कर लिए जाएंगे।”
— आशीष चौहान, जिलाधिकारी देहरादून

अनूप नौटियाल ने उठाए गंभीर सवाल

समाजसेवी एवं पर्यावरणविद अनूप नौटियाल ने राजधानी में पुनर्निर्माण कार्यों की धीमी गति पर चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि यदि देहरादून जैसे शहर में महत्वपूर्ण पुल 10 महीने बाद भी तैयार नहीं हो पाए हैं, तो दूरस्थ आपदाग्रस्त क्षेत्रों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

“जोशीमठ, धराली और थराली जैसे क्षेत्रों में लोग लंबे समय से पुनर्वास और पुनर्निर्माण का इंतजार कर रहे हैं। राजधानी में अधूरे पड़े कार्य चिंता का विषय हैं, खासकर तब जब नया मानसून शुरू हो चुका है।”
— अनूप नौटियाल, पर्यावरण प्रेमी

कांग्रेस का सरकार पर हमला, भाजपा ने अधिकारियों को ठहराया जिम्मेदार

कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने आरोप लगाया कि सरकार ने पिछले साल की आपदा के बाद केवल अस्थायी व्यवस्थाएं की हैं।

उन्होंने कहा कि मालदेवता, मसूरी रोड, प्रेमनगर और लालतप्पड़ जैसे कई स्थानों पर आज भी स्थायी समाधान नहीं दिखाई देता।

वहीं भाजपा नेता सुनील उनियाल गामा ने माना कि कई परियोजनाओं में अपेक्षित गति से काम नहीं हुआ है, लेकिन इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया।

“सरकार ने धन और स्वीकृतियां उपलब्ध कराई हैं, लेकिन कई जगह अधिकारी समय पर काम शुरू नहीं करा पाए। लोगों से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि टेंडर होने के बावजूद निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहे हैं।”
— सुनील उनियाल गामा, भाजपा नेता

पीडब्ल्यूडी की चुप्पी भी बनी चर्चा का विषय

प्रेमनगर पुल, मसूरी रोड और अन्य निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति जानने के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिली।

पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता ओमपाल सिंह से भी संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने व्यस्तता का हवाला देते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

सबसे बड़ा सवाल—क्या इस बार तैयार है देहरादून?

सितंबर 2025 की आपदा ने यह स्पष्ट कर दिया था कि अब प्राकृतिक आपदाएं केवल दूरस्थ पहाड़ी इलाकों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि राजधानी जैसे शहरी क्षेत्रों को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं।

करीब 10 महीने बाद तस्वीर यह है कि कई महत्वपूर्ण पुल और संपर्क मार्ग अब भी पूरी तरह तैयार नहीं हैं। कहीं अस्थायी व्यवस्थाएं ही स्थायी विकल्प बन चुकी हैं तो कहीं निर्माण कार्य अभी भी जारी है।

ऐसे में जब उत्तराखंड में मानसून फिर सक्रिय हो चुका है, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या देहरादून ने पिछले साल की आपदा से पर्याप्त सबक लिया है? यदि एक बार फिर वैसी ही भारी बारिश होती है, तो क्या राजधानी इस बार पहले से अधिक तैयार होगी या फिर उसे अधूरे पुनर्निर्माण और कमजोर तैयारियों के साथ एक और कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ेगा?

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