हरिद्वार: हरिद्वार पुलिस ने नकली नोट छापकर बाजार में खपाने वाले एक संगठित गिरोह का बड़ा खुलासा किया है। दो दिन पहले 52,500 रुपये के नकली नोट बरामद होने के मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस गिरोह की जड़ तक पहुंच गई और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से 50 हजार रुपये मूल्य के छपे नकली नोट, लैपटॉप, दो हाई क्वालिटी प्रिंटर, मोबाइल फोन और नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण बरामद किए गए हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले बिजनौर क्षेत्र में करीब 60 हजार रुपये के नकली नोट बाजार में खपा चुके हैं। फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है।
52,500 रुपये के नकली नोट मिलने से खुली पूरी साजिश
एसपी सिटी (क्राइम) निशा यादव ने मायापुर स्थित कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि 27 जून को श्यामपुर पुलिस ने वनकर्मियों के साथ मारपीट के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। तलाशी के दौरान उनकी कार से 52,500 रुपये के नकली नोट बरामद हुए थे। आरोपियों को जेल भेजने के बाद मामले की विवेचना सीओ अवनी तिवारी को सौंपी गई। पूछताछ और तकनीकी जांच में मिले सुरागों के आधार पर पुलिस को सूचना मिली कि गिरोह के सदस्य नकली नोट छापने में इस्तेमाल किए गए उपकरण और तैयार नकली नोट कार में लेकर बिजनौर के बड़ापुर की ओर ठिकाने लगाने जा रहे हैं।
लालढांग तिराहे पर घेराबंदी कर तीन आरोपी दबोचे
एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर पुलिस ने लालढांग तिराहे के पास घेराबंदी की और संदिग्ध कार को रोक लिया। तलाशी के दौरान पुलिस ने एक लैपटॉप, एचपी और कैनन कंपनी के दो प्रिंटर, पांच मोबाइल फोन, 500 रुपये के चार असली नोट, 25 विशेष पेपर शीट और करीब 50 हजार रुपये मूल्य के 500-500 रुपये के छपे नकली नोट बरामद किए। पुलिस के अनुसार इन नोटों की अभी कटिंग की जानी बाकी थी। इसके अलावा विशेष वॉटरमार्क पेपर भी बरामद किया गया, जिसका इस्तेमाल नकली नोटों को असली जैसा दिखाने के लिए किया जाता था।
ऑनलाइन मंगवाते थे विशेष पेपर, सॉफ्टवेयर से तैयार करते थे नोट
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से नकली नोट तैयार करता था। आरोपी गुलजार अहमद ऑनलाइन विशेष वॉटरमार्क पेपर मंगाता था। इसके बाद शगुन जोशी असली नोट की हाई रिजॉल्यूशन फोटो लेकर सॉफ्टवेयर और मोबाइल एप की मदद से उसकी गुणवत्ता बढ़ाता था, ताकि प्रिंट बिल्कुल असली नोट जैसा दिखाई दे। फिर लैपटॉप और हाई क्वालिटी प्रिंटर की मदद से नोट छापे जाते थे और कटिंग के बाद उन्हें बाजार में खपाने की तैयारी की जाती थी।
पहले भी बाजार में चला चुके हैं हजारों रुपये के नकली नोट
मुख्य आरोपी देवेन्द्र कुमार ने पूछताछ में बताया कि उसने गुलजार अहमद के साथ मिलकर पहले भी बिजनौर के बड़ापुर क्षेत्र में करीब एक लाख रुपये के नकली नोट तैयार किए थे। इनमें कुछ नोट खराब हो गए, लेकिन करीब 60 हजार रुपये के नकली नोट सफलतापूर्वक बाजार में चला दिए गए। इससे हुए मुनाफे के बाद आरोपियों ने गिरोह का विस्तार किया और देवेन्द्र के जीजा शिवम तथा नोटों की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए शगुन जोशी को भी अपने साथ शामिल कर लिया।
तीन आरोपी गिरफ्तार, नेटवर्क की जांच जारी
पुलिस ने इस मामले में देवेन्द्र कुमार निवासी सरदारपुर छामली (बड़ापुर, बिजनौर), गुलजार अहमद निवासी टांडा सिक्कावाला (बड़ापुर, बिजनौर) और शगुन जोशी निवासी लालढांग (श्यामपुर, हरिद्वार) को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।
तकनीक के सहारे चल रहा था नकली नोटों का कारोबार
पुलिस के अनुसार गिरोह ने नकली नोट तैयार करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया था। असली नोटों की हाई क्वालिटी स्कैनिंग, विशेष पेपर, एडिटिंग सॉफ्टवेयर और प्रोफेशनल प्रिंटर का इस्तेमाल कर नकली नोटों को असली जैसा बनाने की कोशिश की जा रही थी। पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि आरोपियों ने अब तक किन-किन क्षेत्रों में नकली नोट खपाए और उनके संपर्क किन लोगों से थे।
हरिद्वार पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और गिरोह के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सभी पहलुओं पर कार्रवाई की जा रही है। साथ ही आम लोगों और व्यापारियों से भी अपील की गई है कि संदिग्ध नोट मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें, ताकि ऐसे गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।







