देहरादून: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित गबन का मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले में अब तक आठ आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है और एसआईटी पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। इसी बीच उत्तराखंड की बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने भी बड़ा कदम उठाते हुए अपने अधीन आने वाले सभी मंदिरों में दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
समिति के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ ने कार्यालय ज्ञापन जारी कर अधिकारियों और कर्मचारियों को दान, चढ़ावा, भेंट, किराया तथा अन्य आय के रख-रखाव और लेखा-जोखा में पूरी पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अयोध्या विवाद के बाद बढ़ाई गई सतर्कता
बीकेटीसी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि वर्तमान में अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में दान और चढ़ावे को लेकर सामने आई खबरों के मद्देनजर उत्तराखंड के मंदिरों में भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद या शिकायत उत्पन्न न हो, इसके लिए विशेष सतर्कता बरतना जरूरी है।
निर्देश सभी दान एवं भेंट गणना केंद्रों, लेखा अनुभाग, खजाना शाखा, पूजा काउंटरों तथा समिति के अधीन संचालित विश्राम गृहों में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को भेजे गए हैं। पत्र में कहा गया है कि मंदिरों में प्राप्त होने वाली धनराशि, सामग्री और अन्य चढ़ावे का सुरक्षित रखरखाव किया जाए तथा प्रत्येक प्राप्ति का नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से रिकॉर्ड तैयार किया जाए।
प्रभारी अधिकारियों को दी गई विशेष जिम्मेदारी
समिति ने सभी प्रभारी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दान और चढ़ावे से जुड़ी प्रत्येक प्रक्रिया की नियमित निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी कार्य निर्धारित नियमों के अनुसार हों। साथ ही आय और चढ़ावे से संबंधित रिकॉर्ड हमेशा अद्यतन रखा जाए।
सीईओ ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता, गड़बड़ी या शिकायत सामने आती है तो संबंधित अधिकारी अथवा कर्मचारी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। समिति का मानना है कि पारदर्शी व्यवस्था से श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत होता है और धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता बनी रहती है।
करोड़ों रुपये का मिलता है दान
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधीन आने वाले मंदिरों में हर वर्ष श्रद्धालुओं की ओर से करोड़ों रुपये का दान और चढ़ावा प्राप्त होता है। विशेष रूप से चारधाम यात्रा के दौरान यह राशि कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में दान राशि और अन्य आय का पारदर्शी और व्यवस्थित प्रबंधन समिति की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में शामिल है।
माना जा रहा है कि अयोध्या राम मंदिर से जुड़े विवाद के बाद बीकेटीसी ने एहतियातन यह कदम उठाया है, ताकि भविष्य में उत्तराखंड के मंदिरों में किसी प्रकार के विवाद या आरोप की स्थिति उत्पन्न न हो।
सभी संबंधित अधिकारियों को भेजे गए आदेश
समिति ने इस आदेश की प्रतिलिपि बदरीनाथ और केदारनाथ के प्रभारी अधिकारियों, थाली भेंट प्रभारी, लेखाकार, खजांची, विश्राम गृह प्रबंधकों और केयरटेकरों को भी भेजी है। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बीकेटीसी के अधीन आते हैं 47 प्रमुख मंदिर
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधीन बदरीनाथ और केदारनाथ धाम सहित उत्तराखंड के 47 प्रमुख मंदिर और धार्मिक स्थल संचालित होते हैं। इनमें त्रियुगीनारायण मंदिर, नरसिंह मंदिर, विश्वनाथ मंदिर, ओंकारेश्वर मंदिर, कालीमठ मंदिर, मद्महेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, कल्पेश्वर, योगध्यान बदरी, भविष्य बदरी, आदि बदरी, वृद्ध बदरी, माता मूर्ति मंदिर, वासुदेव मंदिर, गौरीकुंड मंदिर, आदिकेदारेश्वर मंदिर, ब्रह्मकपाल, तप्तकुंड, शंकराचार्य समाधि, पंच शिलाएं, पंच धाराएं, उषा मंदिर, कालिशिला और वसुधारा सहित कई धार्मिक स्थल शामिल हैं।
क्या है बीकेटीसी?
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) वर्ष 1939 के अधिनियम के तहत गठित संस्था है, जो बदरीनाथ और केदारनाथ धाम समेत 47 प्रमुख मंदिरों के प्रबंधन, रखरखाव, सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालती है। समिति मंदिरों के कपाट खुलने और बंद होने की प्रक्रिया, तीर्थयात्रियों की सुविधाओं, विकास कार्यों और बजट प्रबंधन का भी संचालन करती है।
हाल ही में बीकेटीसी ने चारधाम यात्रा 2026 के लिए 121 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। समिति के वर्तमान अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी हैं। वहीं, उद्योगपति मुकेश अंबानी ने हाल ही में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति को 10 करोड़ रुपये का दान दिया था। इससे पहले भी उन्होंने पिछले वर्ष समिति को 10 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की थी।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद बीकेटीसी का यह कदम उत्तराखंड के मंदिरों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।







