देहरादून: उत्तराखंड में लंबे समय से रुकी शिक्षकों की स्थानांतरण और पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर सरकार बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। विद्यालयी शिक्षा विभाग अब वार्षिक तबादला प्रक्रिया के लिए समय सीमा बढ़ाने और स्थानांतरण अधिनियम (ट्रांसफर एक्ट) से सीमित छूट लेने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इसके साथ ही प्रमोशन से जुड़े न्यायिक विवादों को देखते हुए सरकार वैकल्पिक व्यवस्था पर भी काम कर रही है, ताकि शिक्षकों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान किया जा सके।
कार्मिक विभाग को भेजा जाएगा प्रस्ताव
शिक्षा विभाग जल्द ही कार्मिक विभाग को प्रस्ताव भेजेगा, जिसमें वार्षिक स्थानांतरण के लिए अतिरिक्त समय देने और ट्रांसफर एक्ट की कुछ धाराओं से सीमित छूट की मांग की जाएगी। विभाग का मानना है कि इससे प्रदेश के उन सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती संभव हो सकेगी, जहां पर्याप्त छात्र संख्या होने के बावजूद लंबे समय से पद रिक्त पड़े हैं।
सरकार का उद्देश्य दूरस्थ और शिक्षक विहीन स्कूलों में जल्द से जल्द शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित करना है, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
उच्च स्तरीय बैठक में बनी सहमति
शासन स्तर पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि वर्तमान परिस्थितियों में स्थानांतरण प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अतिरिक्त समय और अधिनियम में आवश्यक छूट देना जरूरी है।
बैठक में यह भी माना गया कि ऐसा होने पर धारा-27 और अनुरोध श्रेणी के अंतर्गत लंबित तबादला मामलों का भी शीघ्र निस्तारण किया जा सकेगा।
इससे पहले मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में शिक्षकों के स्थानांतरण और पदोन्नति से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि दोनों प्रस्ताव शीघ्र तैयार कर शासन के माध्यम से कार्मिक विभाग को भेजे जाएं।
हाईकोर्ट में लंबित मामलों से अटकी प्रक्रिया
वर्तमान में शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण और वरिष्ठता से जुड़े कई मामले उत्तराखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं। इसी वजह से शिक्षा विभाग अंतिम निर्णय लेने की स्थिति में नहीं पहुंच पाया है।
इसका सीधा असर प्रदेश के अनेक सरकारी विद्यालयों पर पड़ा है, जहां लंबे समय से शिक्षकों के पद खाली हैं और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
प्रमोशन के लिए अध्यादेश भी ला सकती है सरकार
माध्यमिक शिक्षा में पदोन्नति का मुद्दा भी लंबे समय से विवादों में है। वरिष्ठता निर्धारण से जुड़े मामले न्यायालय में लंबित होने के कारण विभाग पदोन्नति प्रक्रिया शुरू नहीं कर पा रहा है, जबकि शिक्षक संगठन लगातार प्रमोशन की मांग कर रहे हैं।
ऐसे में सरकार ने एक वैकल्पिक योजना भी तैयार की है। यदि न्यायालय में मामलों के निस्तारण में अधिक समय लगता है, तो अध्यादेश लाकर वरिष्ठता निर्धारण के आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने का विकल्प अपनाया जा सकता है।
इसके लिए विभागीय अधिकारियों को अध्यादेश का प्रारूप भी तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर बिना देरी के प्रक्रिया शुरू की जा सके।
शिक्षा व्यवस्था में होंगे व्यापक सुधार
बैठक में केवल स्थानांतरण और पदोन्नति ही नहीं, बल्कि विद्यालयी शिक्षा के ढांचागत सुधारों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को विद्यालयी शिक्षा के त्रिस्तरीय ढांचे, एससीईआरटी (SCERT) और डायट (DIET) के नए ढांचे तथा उनकी नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का लक्ष्य शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था और शैक्षणिक प्रशासन को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाना है।
सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं पर भी फोकस
सरकार ने सभी सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं। इसमें शत-प्रतिशत शौचालय निर्माण, स्वच्छ पेयजल, नियमित बिजली आपूर्ति और अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
सरकार का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए केवल शिक्षकों की उपलब्धता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बेहतर आधारभूत ढांचा भी उतना ही आवश्यक है।
अशासकीय विद्यालयों पर भी होगा फैसला
बैठक में अशासकीय विद्यालयों के प्रांतीयकरण और शिक्षकों की तदर्थ सेवाओं को नियमानुसार जोड़ने की प्रक्रिया में तेजी लाने पर भी सहमति बनी।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार शिक्षकों के स्थानांतरण, पदोन्नति और अन्य लंबित मामलों पर तेजी से निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि एक ओर स्थानांतरण प्रक्रिया समय पर पूरी हो, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की वर्षों पुरानी समस्याओं का भी स्थायी समाधान निकाला जा सके।
यदि प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो उत्तराखंड में लंबे समय से रुकी शिक्षकों की तबादला और पदोन्नति प्रक्रिया को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिसका सीधा लाभ प्रदेश के हजारों शिक्षकों और लाखों विद्यार्थियों को मिलेगा।







