हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार के वीआईपी घाट के समीप आयोजित भारतीय किसान यूनियन (क्रांति अराजनीतिक) के किसान महाकुंभ एवं चिंतन शिविर में किसानों की समस्याओं के साथ-साथ एक विवाद भी चर्चा का विषय बन गया। कार्यक्रम में जहां सैकड़ों किसानों ने कृषि, बिजली, गन्ना भुगतान और सरकारी योजनाओं समेत विभिन्न मुद्दों पर मंथन किया, वहीं मंच के पास फिल्मी गानों पर महिला कलाकारों के डांस का वीडियो सामने आने के बाद तीर्थ क्षेत्र की मर्यादा को लेकर सवाल खड़े हो गए। मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस ने मौके पर पहुंचकर डांस कार्यक्रम बंद करा दिया।
सैकड़ों किसानों ने उठाई अपनी आवाज
हरिद्वार के वीआईपी घाट के पास आयोजित किसान महाकुंभ में जिले और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपनी विभिन्न समस्याओं पर चर्चा करते हुए प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम आठ सूत्रीय मांगपत्र भेजा।
कार्यक्रम में किसानों ने कृषि, बिजली, गन्ना भुगतान, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की और सरकार से जल्द समाधान की मांग की।
बीजेपी नेताओं ने भी की शिरकत
किसान महाकुंभ में कई जनप्रतिनिधि और भाजपा से जुड़े नेता भी शामिल हुए। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, दर्जाधारी श्यामवीर सैनी, पूर्व भाजपा नेता अजय वर्मा सहित कई नेताओं ने किसानों को उनकी मांगें सरकार तक पहुंचाने और समाधान का प्रयास करने का भरोसा दिलाया।
फिल्मी गानों पर डांस का वीडियो वायरल
कार्यक्रम के दौरान मंच के समीप सांस्कृतिक आयोजन भी रखा गया था। इसी दौरान महिला कलाकारों ने फिल्मी गानों पर प्रस्तुति दी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो सामने आने के बाद गंगा तट जैसे धार्मिक स्थल पर फिल्मी गानों पर डांस को लेकर तीर्थ क्षेत्र की गरिमा और मर्यादा पर सवाल उठने लगे। हालांकि वायरल वीडियो में कोई मंत्री या जनप्रतिनिधि डांस कार्यक्रम के दौरान मौजूद दिखाई नहीं दे रहा है।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर रुकवाया कार्यक्रम
डांस कार्यक्रम का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने तत्काल मामले का संज्ञान लिया। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और कार्यक्रम को बंद कराते हुए आयोजकों को भविष्य में इस प्रकार के आयोजन से बचने की सख्त हिदायत दी।
घटना के बाद पूरे मामले को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया और धार्मिक स्थल पर ऐसे आयोजनों की उपयुक्तता को लेकर बहस छिड़ गई।
आयोजकों ने दी सफाई
भाकियू (क्रांति अराजनीतिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास सैनी ने विवाद पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि किसान महाकुंभ में लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रागिनी कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दी थीं।
उन्होंने साथ ही किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि सरकार की कई योजनाओं का लाभ आज भी जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा है। किसानों के हित में नीतियों में बदलाव की आवश्यकता है ताकि किसान भी विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ सकें।
किसानों ने रखीं ये प्रमुख मांगें
किसान महाकुंभ में संगठन ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—
- स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाई जाए।
- उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी किसानों के ट्यूबवेल की बिजली निशुल्क की जाए।
- इकबालपुर चीनी मिल पर किसानों का लंबित गन्ना भुगतान जल्द कराया जाए।
- प्रदेशभर में किसानों के लिए एक समान नियम लागू किए जाएं।
- जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सहायता और अनुदान दिया जाए।
- वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाकर ₹5,000 प्रतिमाह की जाए।
- शिक्षा और चिकित्सा सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाएं।
- गन्ने का समर्थन मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल घोषित किया जाए।
- किसान क्रेडिट कार्ड की प्रक्रिया सरल बनाते हुए स्टांप ड्यूटी समाप्त की जाए।
विकास सैनी ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन व्यापक आंदोलन शुरू करेगा।
गंगा सभा ने जताई नाराजगी
वहीं, वीआईपी घाट के सामने फिल्मी गानों पर डांस के मामले में श्री गंगा सभा ने नाराजगी जताई है।
सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि किसी भी संगठन को कार्यक्रम आयोजित करने का अधिकार है, लेकिन हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थल की धार्मिक गरिमा और मर्यादा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गंगा तट पर होने वाले आयोजनों में सांस्कृतिक और धार्मिक वातावरण के अनुरूप आचरण होना आवश्यक है।
फिलहाल किसान महाकुंभ में उठी किसानों की मांगों के साथ-साथ डांस कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ विवाद भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित संगठन भविष्य में इस तरह के आयोजनों के लिए क्या दिशा-निर्देश तय करते हैं।







