हरिद्वार: देश के प्रमुख मंदिरों में चढ़ावे की राशि में कथित अनियमितताओं के मामलों के बीच हरिद्वार के प्रसिद्ध सिद्धपीठ मनसा देवी मंदिर में बड़ा फैसला लिया गया है। मंदिर ट्रस्ट ने चढ़ावे की धनराशि में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी रोकने के लिए सभी पुजारियों और कर्मचारियों को ईमानदारी व सुचिता बनाए रखने की शपथ दिलाई है। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि कोई भी पुजारी या कर्मचारी चढ़ावे का निजी उपयोग करता या उसमें हेराफेरी करते हुए पाया गया, तो उसे तत्काल सेवा से निष्कासित करने के साथ उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
महंत रविंद्र पुरी ने दिलाई शपथ
मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट एवं अखाड़ा परिषद (निरंजनी गुट) के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने सोमवार को मंदिर परिसर में पुजारियों और कर्मचारियों की बैठक बुलाई। बैठक में उन्होंने सभी को मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं की आस्था बनाए रखने की शपथ दिलाई।
उन्होंने कहा कि मंदिर में आने वाला चढ़ावा श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है और इसकी सुरक्षा व पारदर्शिता सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है।
चढ़ावे की निगरानी के लिए बनी सात सदस्यीय समिति
महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि चढ़ावे की धनराशि की निगरानी के लिए सात सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया गया है। यह समिति मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी पूरी व्यवस्था पर नजर रखेगी।
उन्होंने साफ कहा कि यदि कोई भी पुजारी या कर्मचारी चढ़ावे की राशि में हेराफेरी करता हुआ पाया गया तो उसे मंदिर से बाहर का रास्ता दिखाने के साथ-साथ उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर जेल भेजा जाएगा।
बदरीनाथ और अयोध्या के मामलों के बाद लिया गया फैसला
हाल के दिनों में अयोध्या राम मंदिर में चंदे की कथित अनियमितताओं के मामले में एसआईटी जांच और कर्मचारियों की गिरफ्तारी की खबरों के बाद उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम में भी चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने जांच समिति गठित करने के साथ संबंधित कर्मचारियों को नोटिस भी जारी किए हैं।
इन्हीं घटनाओं के बाद मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने भी एहतियातन चढ़ावे की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाया है।
संत समाज ने भी जताई चिंता
महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि देशभर के मंदिरों में समय-समय पर चढ़ावे से जुड़ी शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों से श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित होती है। इसलिए जरूरी है कि मंदिरों में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि मंदिर प्रशासन किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगा और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अखाड़ा परिषद को लेकर भी दिया बयान
हाल ही में गठित दूसरी अखाड़ा परिषद की कार्यकारिणी पर प्रतिक्रिया देते हुए महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि उनके नेतृत्व वाले अखाड़ा परिषद को सात प्रमुख अखाड़ों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने दावा किया कि हरिद्वार के अर्धकुंभ को पूर्ण कुंभ घोषित कराने से लेकर नासिक और उज्जैन कुंभ तक उनके संगठन की सक्रिय भूमिका रही है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 के कुंभ मेले की व्यवस्थाओं में भी उनका ही अखाड़ा परिषद प्रमुख भूमिका निभाएगा, क्योंकि उन्हें बहुमत और सात बड़े अखाड़ों का समर्थन प्राप्त है।







