नैनीताल: भवाली व्यापार मंडल अध्यक्ष नरेश पांडे से जुड़े चर्चित दुष्कर्म प्रकरण में एक नया मोड़ सामने आया है। मामले में सबसे पहले शिकायत दर्ज कराने वाली युवती को नैनीताल पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। देर शाम तक मल्लीताल कोतवाली में उससे लगातार पूछताछ की गई। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दुष्कर्म, गर्भपात और धमकी के आरोपों से शुरू हुआ था मामला
गौरतलब है कि नैनीताल के एक शिक्षण संस्थान में अध्ययनरत छात्रा ने भवाली व्यापार मंडल अध्यक्ष नरेश पांडे पर शारीरिक शोषण, दबाव बनाकर गर्भपात कराने और जान से मारने की धमकी देने समेत कई गंभीर आरोप लगाए थे। युवती की तहरीर पर मल्लीताल कोतवाली में विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामला सामने आने के बाद पूरे जिले में इसकी व्यापक चर्चा हुई।
अग्रिम जमानत नहीं मिली, बाद में हुई गिरफ्तारी
मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए नरेश पांडे ने पहले जिला न्यायालय और फिर उत्तराखंड हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन दोनों अदालतों से उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हाई वोल्टेज ड्रामे के बीच गिरफ्तार किया। अदालत में पेशी के बाद न्यायालय ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
जांच के तहत पहली शिकायतकर्ता से पूछताछ
अब पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए पहली शिकायतकर्ता युवती को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामले से जुड़े विभिन्न तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों के बयानों का मिलान किया जा रहा है। इसी क्रम में युवती से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत पूछताछ की जा रही है।
हालांकि, पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि युवती को किस आधार पर हिरासत में लिया गया है और उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज किया गया है या नहीं।
एसएसपी बोले- पूछताछ के बाद होगी आगे की कार्रवाई
नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी ने बताया कि मामले में संलिप्त युवती को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। उससे विस्तृत पूछताछ की जा रही है और पूछताछ पूरी होने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का मानना है कि पूछताछ और जांच के अगले चरण में इस चर्चित मामले से जुड़े कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कर रही है और आधिकारिक रूप से किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है।







