चमोली: थराली में गर्भवती महिला और नवजात की एंबुलेंस में हुई मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मामले की जांच में कथित देरी से नाराज मृतका के पति नरेंद्र कुमार मंगलवार को अपनी मां और दो छोटे बच्चों के साथ थराली मोटर पुल पर धरने पर बैठ गए। पीड़ित परिवार के धरने पर बैठने से प्रशासन में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही उप जिलाधिकारी (एसडीएम) मौके पर पहुंचे और जांच जल्द पूरी कराने तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से वार्ता कराने का आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया।
क्या है पूरा मामला?
मामला 29 जून का है, जब थराली ब्लॉक के लेटाल गांव निवासी 35 वर्षीय सरिता देवी को प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) थराली लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि महिला को अस्पताल में करीब चार घंटे तक रोके रखा गया और स्थिति बिगड़ने के बाद उसे कर्णप्रयाग हायर सेंटर रेफर किया गया।
हालांकि, कर्णप्रयाग पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस में जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल के मेडिकल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध नहीं था, जिसके कारण समय पर उपचार नहीं मिल सका।
जांच में देरी से नाराज परिवार
घटना के बाद परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन लंबे समय तक जांच पूरी नहीं होने से नाराज मृतका के पति नरेंद्र कुमार अपनी मां और दोनों बच्चों के साथ थराली मोटर पुल पर धरने पर बैठ गए।
धरने के दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।
‘इतने दिन बीत गए, अब तक नहीं मिला न्याय’
मृतका के पति नरेंद्र कुमार का कहना है कि घटना को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो जांच पूरी हुई और न ही दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई।
उन्होंने बताया कि एक दिन पहले उन्हें फोन कर जांच टीम के सामने बयान देने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली बुलाया गया था। उन्होंने टीम से गांव आने का अनुरोध किया, लेकिन उन्हें अस्पताल आने के लिए कहा गया।
नरेंद्र कुमार के अनुसार, जब वे अस्पताल पहुंचे तो जांच टीम वहां मौजूद नहीं थी। बाद में संपर्क करने पर भी उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिली, जिससे आहत होकर उन्होंने धरने का रास्ता चुना।
उन्होंने कहा कि अब वे चाहते हैं कि जांच जल्द पूरी हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें न्याय मिले।
एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर कराया समझौता
धरने की सूचना मिलते ही थराली के उप जिलाधिकारी (एसडीएम) यशवीर रावत मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार से बातचीत की। इसके बाद उन्हें तहसील ले जाकर उनकी मांगों को सुना गया।
एसडीएम ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम को पीड़ित परिवार के बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया था, लेकिन टीम समय पर नहीं पहुंच सकी, जिससे नाराज होकर परिवार धरने पर बैठ गया।
उन्होंने कहा कि जांच टीम को तत्काल स्थिति से अवगत करा दिया गया है और अब टीम पहुंचकर पीड़ित परिवार के बयान दर्ज करेगी। साथ ही जांच प्रक्रिया पूरी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
गर्भवती महिला और नवजात की मौत के मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं और रेफरल व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, अस्पताल प्रशासन पर लगाए गए लापरवाही और एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर न होने जैसे आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना में किसी प्रकार की चिकित्सीय लापरवाही हुई थी या नहीं, और यदि हुई तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।







