देहरादून: टिहरी गढ़वाल स्थित श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय को नया कुलपति मिल गया है। उत्तराखंड के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने प्रोफेसर अम्बरीश कुमार महाजन को विश्वविद्यालय का नया कुलपति नियुक्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं। जारी आदेश के अनुसार, प्रो. महाजन अपने कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से अगले तीन वर्षों के लिए या 68 वर्ष की अधिवर्षता आयु पूरी होने अथवा अगले आदेश तक इस पद पर कार्य करेंगे।
वर्तमान में केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला में हैं वरिष्ठ प्रोफेसर
प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन वर्तमान में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला में पर्यावरण विज्ञान के वरिष्ठ प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे भूगर्भ विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष तथा संबंधित शोध एवं जीआईएस केंद्र के निदेशक की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।
अंतरिम व्यवस्था समाप्त, नियमित कुलपति की नियुक्ति
कुलाधिपति द्वारा जारी आदेश में श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति पद के लिए की गई अंतरिम व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। कुलपति चयन समिति की संस्तुति के आधार पर प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन की नियमित नियुक्ति की गई है।
आपदा प्रबंधन और भूगर्भ विज्ञान के विशेषज्ञ
प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन देश के जाने-माने आपदा प्रबंधन और भूगर्भ विज्ञान विशेषज्ञ हैं। विशेष रूप से भूस्खलन (लैंडस्लाइड) के क्षेत्र में उनका व्यापक शोध और अनुभव रहा है। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय में शोध, नवाचार और अकादमिक गुणवत्ता को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
शिक्षकों की कमी दूर करना होगी पहली प्राथमिकता
नवनियुक्त कुलपति प्रो. महाजन ने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी को दूर करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उनका लक्ष्य विश्वविद्यालय को शैक्षणिक उत्कृष्टता और शोध के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना होगा।
प्रो. महाजन की नियुक्ति को विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शिक्षा जगत को उम्मीद है कि उनके अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ छात्रों, शिक्षकों और पूरे विश्वविद्यालय को मिलेगा तथा संस्थान शोध और नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।







