देहरादून: उत्तराखंड में वर्षवार (सीनियरिटी आधारित) नर्सिंग भर्ती की मांग को लेकर पिछले कई महीनों से चल रहा आंदोलन बुधवार को उस समय बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया, जब स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के यमुना कॉलोनी स्थित सरकारी आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान चार महिला नर्सिंग अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर आत्महत्या का प्रयास किया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और पुलिस-प्रशासन ने तत्काल चारों महिलाओं को दून अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है। बताया जा रहा है कि इनमें से एक छात्रा की हालत गंभीर बनी हुई है।
प्रदर्शन के दौरान मची अफरा-तफरी
वर्षवार भर्ती की मांग को लेकर नर्सिंग अभ्यर्थी पिछले करीब आठ महीनों से एकता विहार में धरना दे रहे हैं। बुधवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से मिलने उनके आवास पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक चार महिला अभ्यर्थियों ने आत्मघाती कदम उठा लिया, जिससे प्रदर्शन स्थल पर हड़कंप मच गया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और चारों महिलाओं को सरकारी वाहनों से तत्काल दून अस्पताल पहुंचाया गया। फिलहाल सभी का इलाज जारी है।
एक छात्रा की हालत गंभीर
नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल पुंडीर ने बताया कि आत्महत्या का प्रयास करने वाली चारों महिलाओं की पहचान की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि इनमें से एक छात्रा की हालत गंभीर बताई जा रही है और संगठन के प्रतिनिधि भी अस्पताल पहुंच रहे हैं।
पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और अस्पताल प्रशासन से लगातार स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली जा रही है।
मंत्री से मुलाकात नहीं होने पर जताई नाराजगी
घटना के बाद भी स्वास्थ्य मंत्री के आवास के बाहर नर्सिंग अभ्यर्थियों का धरना जारी रहा। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है।
एक महिला अभ्यर्थी ने कहा,
“आज नर्सिंग अभ्यर्थी यमुना कॉलोनी में स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से बात करने आए थे, लेकिन वह हमसे नहीं मिले। पिछले आठ महीने से हमारा धरना चल रहा है, लेकिन आज तक स्वास्थ्य मंत्री ने वार्ता नहीं की। हम यहां किसी तरह का दंगा या हंगामा करने नहीं आए थे।”
एक अन्य महिला अभ्यर्थी ने कहा,
“हम सुबह ही 20 से 25 लोग बातचीत के लिए आए थे, लेकिन अब तक मंत्री हमसे नहीं मिले। हमारी मांग है कि वर्षवार यानी सीनियरिटी के आधार पर भर्ती की जाए। हमारी उम्र निकलती जा रही है। मेरे बैच के 40 लोगों में से कुछ निजी नौकरी कर रहे हैं, जबकि कई लोगों को पहले ही सरकारी नौकरी मिल चुकी है।”
क्या है अभ्यर्थियों की मांग?
नर्सिंग अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया वर्षवार (सीनियरिटी के आधार) पर की जाए। उनका तर्क है कि लंबे समय से भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों की आयु सीमा लगातार बढ़ रही है और नियमों में बदलाव के कारण उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।
दूसरी ओर, सरकार भर्ती प्रक्रिया को वर्तमान नियमों के अनुसार आगे बढ़ाने की बात कहती रही है। इसी मुद्दे को लेकर कई महीनों से आंदोलन जारी है।
आंदोलन के बाद बढ़ा दबाव
चार महिला अभ्यर्थियों द्वारा आत्महत्या के प्रयास की घटना के बाद नर्सिंग भर्ती विवाद और अधिक संवेदनशील हो गया है। फिलहाल सभी की निगाहें सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। वहीं, अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
नोट: यदि आपके मन में आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे विचार आ रहे हों, तो कृपया अपने किसी विश्वसनीय परिजन, मित्र या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करें। समय पर सहायता मिलना बेहद महत्वपूर्ण है।






