खटीमा: बुलंद हौसले और दृढ़ संकल्प के दम पर खटीमा के एक युवा ने वह कर दिखाया, जिसका सपना हर पर्वतारोही देखता है। उधम सिंह नगर जिले के खटीमा स्थित अंजनिया गांव के रहने वाले बीएसएफ जवान मोहन सिंह राणा ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह कर इतिहास रच दिया है। इसके साथ ही वह थारू जनजाति समाज के पहले ऐसे युवा बन गए हैं, जिन्होंने एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर अपने समाज, क्षेत्र और पूरे उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया है।
बीएसएफ के एवरेस्ट अभियान का रहे हिस्सा
अंजनिया चकरपुर ग्राम निवासी मोहन सिंह राणा वर्ष 2012 में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में भर्ती हुए थे। बीएसएफ के 12 सदस्यीय पर्वतारोही दल के साथ उन्होंने एवरेस्ट अभियान में हिस्सा लिया और कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सफलता हासिल की।
मोहन सिंह राणा और उनकी टीम ने 21 जून को विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचकर तिरंगा फहराया और भारत का नाम रोशन किया।
घर लौटने पर हुआ भव्य स्वागत
एवरेस्ट फतह करने के बाद जब मोहन सिंह राणा अपने गृह गांव अंजनिया, खटीमा पहुंचे तो स्थानीय लोगों, परिजनों और सामाजिक संगठनों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पूरे क्षेत्र में उनकी इस उपलब्धि को लेकर उत्साह का माहौल देखने को मिला।
थारू समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
मोहन सिंह राणा की इस सफलता को थारू जनजाति समाज के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। थारू राणा परिषद, खटीमा के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ जनजातीय नेता एडवोकेट रमेश सिंह राणा ने समाज के युवाओं के साथ मिलकर उनका सम्मान किया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि एक साधारण किसान परिवार से निकलकर मोहन सिंह राणा ने अपनी मेहनत, लगन और साहस के बल पर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को फतह कर पूरे थारू समाज, खटीमा और उत्तराखंड का नाम रोशन किया है।
युवाओं के लिए बने प्रेरणा
एडवोकेट रमेश सिंह राणा ने कहा कि मोहन सिंह राणा की उपलब्धि जनजातीय समाज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। इससे युवा यह सीखेंगे कि कठिन मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले खटीमा की बेटी और आईटीबीपी की जवान तिला सैन भी माउंट एवरेस्ट फतह कर क्षेत्र का गौरव बढ़ा चुकी हैं। अब मोहन सिंह राणा की सफलता ने एक बार फिर खटीमा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण
मोहन सिंह राणा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। उनकी सफलता को उत्तराखंड के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया जा रहा है। सीमित संसाधनों से निकलकर विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराने वाले मोहन सिंह राणा ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।






