देहरादून: नंदा की चौकी के पास टौंस नदी पर बने पुल की एप्रोच रोड धंसने के मामले में लोक निर्माण विभाग (PWD) ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने निर्माण कार्य कर रही **हिमालयन कंस्ट्रक्शन कंपनी को तत्काल प्रभाव से नहिमालयन कंस्ट्रक्शन कंपनी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही कंपनी को अगले आदेश तक उत्तराखंड PWD की निविदा (टेंडर) प्रक्रिया में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
यह मामला 28 जुलाई 2026 को सामने आया था, जब प्रेमनगर क्षेत्र में नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड अचानक धंस गई थी। सड़क पर बड़ा गड्ढा बनने के बाद निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे थे। घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल सड़क को दुरुस्त कराया और मामले की जांच बैठा दी थी।
गौरतलब है कि घटना के लगभग 10 दिन बाद विभाग ने पहले **तीन इंजीनियरतीन इंजीनियरों को निलंबित किया था और अब 8 अगस्त को निर्माण कंपनी पर भी कार्रवाई कर दी गई है।
भारी बारिश और फ्लैश फ्लड बना कारण
PWD के अनुसार, देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-72 पर टौंस नदी के पास उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के समीप पहले से क्षतिग्रस्त पुल के पुनर्निर्माण और सुदृढ़ीकरण का कार्य चल रहा था। यह काम अनुबंध संख्या 36/SE-09/2025-26 (दिनांक 31 जनवरी 2026) के तहत *मैसर्स हिमालयन कंस्ट्रक्शन, सारथी विहार, देहरादून को दिया गया था।
28 जुलाई की सुबह हुई भारी बारिश और फ्लैश फ्लड के बाद पुल की एप्रोच रोड को नुकसान पहुंचा। विभागीय जांच में सामने आया कि **अपस्ट्रीम प्रोटेक्शनअपस्ट्रीम प्रोटेक्शन वॉल के नीचे स्कॉरिंग (कटाव) होने के कारण एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त हुई।
शासन ने मांगी थी प्राथमिक जांच रिपोर्ट
मामले को गंभीर मानते हुए लोक निर्माण विभाग के सचिव ने उसी दिन मुख्य अभियंता, क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून को प्राथमिक जांच के निर्देश दिए थे। जांच में मिले तथ्यों और अभिलेखीय साक्ष्यों सहित रिपोर्ट शासन को भेजने को कहा गया था।
मुख्य अभियंता की ओर से 3 अगस्त 2026 को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई। रिपोर्ट में एप्रोच रोड को हुए नुकसान का मुख्य कारण **भारी कटाव (Heavy Scभारी कटाव (Heavy Scouring) बताया गया।
वैज्ञानिक जांच के लिए GPR और ERT टेस्ट होंगे
जांच के दौरान मौके पर स्कॉर की वास्तविक गहराई का आकलन नहीं हो सका। इसके लिए जांच अधिकारी ने ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार (GPR) और इलेक्ट्रिकल रेसिस्टिविटी टेस्ट (ERT) कराने की सिफारिश की है, ताकि कटाव की वास्तविक स्थिति और गहराई का वैज्ञानिक तरीके से पता लगाया जा सके।
कंपनी पर विभागीय कार्रवाई
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर PWD ने हिमालयन कंस्ट्रक्शन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसका पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही कंपनी को अग्रिम आदेश तक विभाग की सभी निविदा प्रक्रियाओं से बाहर कर दिया गया है।
अब मामला केवल तकनीकी जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निर्माण एजेंसी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। GPR और ERT जांच के बाद आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारी तय की जाएगी।
रुचि भट्ट ने स्वीकार की हिस्सेदारी
मामले में **भाजभाजपा महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने हिमालयन कंस्ट्रक्शन में अपनी हिस्सेदारी होने की बात स्वीकार की है।
रुचि भट्ट ने कहा कि कंपनी से जुड़े मामले में जो भी जिम्मेदारी बनती है, वह उससे पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार और विभाग की ओर से जो भी कार्रवाई की जाएगी, वह उसके लिए तैयार हैं और जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उनका पालन किया जाएगा।
तकनीकी रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
अब पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका तकनीकी जांच रिपोर्ट की होगी। GPR और ERT जांच के बाद स्कॉर की वास्तविक गहराई और पुल की संरचना पर उसके प्रभाव का आकलन किया जाएगा। इसी आधार पर आगे की जिम्मेदारी और संभावित कार्रवाई तय की जा सकती है।







