देहरादून: हाल ही में 25 जून, 25 जुलाई और 26 जुलाई को आयोजित नर्सिंग भर्ती परीक्षा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नर्सिंग एकता मंच और बेरोजगार संघ ने संयुक्त रूप से भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पैसों के लेन-देन के गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों संगठनों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए सरकार से तत्काल उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल पुंडीर ने कहा कि मंच लंबे समय से वर्षवार भर्ती किए जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है, लेकिन उनकी मांगों का समाधान नहीं हो पा रहा है। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों की आशंकाओं को गंभीरता से नहीं लिया गया।
नवल पुंडीर और बेरोजगार संघ के प्रतिनिधि राम कंडवाल ने संयुक्त रूप से दावा किया कि उन्हें कुछ ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनमें नौकरी दिलाने के नाम पर एक अभ्यर्थी से कथित तौर पर लाखों रुपये की मांग और भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चारू चंद्र जोशी नामक व्यक्ति ने एक महिला अभ्यर्थी से नौकरी लगवाने के लिए करीब 32 लाख रुपये की मांग की थी।
आंदोलनकारियों के अनुसार, संबंधित महिला अभ्यर्थी द्वारा अलग-अलग खातों में धनराशि भेजी गई और कुल लेन-देन लगभग 35 लाख रुपये तक पहुंचा। उनका यह भी दावा है कि कथित भुगतान की व्यवस्था करने के लिए महिला अभ्यर्थी को सोना और अन्य सामान तक गिरवी रखना पड़ा। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और मामले की वास्तविकता आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
नर्सिंग एकता मंच ने सवाल उठाया है कि यदि किसी एक अभ्यर्थी से इतनी बड़ी रकम की मांग की गई, तो क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या संगठित गिरोह काम कर रहा है। संगठन ने भर्ती प्रक्रिया में संभावित अंदरूनी मिलीभगत की भी जांच कराए जाने की मांग की है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्होंने पहले भी सरकार और संबंधित अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया को लेकर अपनी आशंकाओं से अवगत कराया था। उनका आरोप है कि लिखित आश्वासन मिलने के बावजूद शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई और परीक्षा निर्धारित समय पर आयोजित कर दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि करीब दो हजार अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन नहीं किए जाने के मुद्दे पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
नर्सिंग एकता मंच और बेरोजगार संघ ने प्रदेश सरकार तथा स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की जांच के लिए विशेष कार्यबल (एसटीएफ) या विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाए। उनका कहना है कि जांच पूरी होने तक भर्ती परीक्षा को निरस्त करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
संगठनों ने मांग की है कि जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं, ताकि अभ्यर्थियों और प्रदेश की जनता के सामने पूरी सच्चाई आ सके। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से भी अलग जांच टीम गठित कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।
नर्सिंग एकता मंच और बेरोजगार संघ ने सरकार को तीन दिन का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में जांच को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो नर्सिंग अभ्यर्थी, वरिष्ठ अभ्यर्थी और समर्थन कर रहे अन्य संगठन बड़े आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरेंगे।
हालांकि, भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं और लेन-देन को लेकर लगाए गए सभी आरोप फिलहाल अभ्यर्थियों और आंदोलनकारियों के दावों पर आधारित हैं। मामले में कथित लेन-देन, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और भर्ती प्रक्रिया में किसी अधिकारी अथवा अन्य व्यक्ति की संलिप्तता की पुष्टि केवल आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।







