चमोली: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश लोगों की परेशानियां बढ़ा रही है। चमोली जिले के देवाल विकासखंड स्थित दूरस्थ हरमल गांव में भूस्खलन के कारण हालात गंभीर हो गए हैं। गांव को जोड़ने वाला मोटर मार्ग पहले से ही बंद पड़ा था, वहीं अब भूस्खलन की चपेट में आने से पैदल रास्ता भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। इससे ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित होने के साथ ही जरूरी सुविधाओं तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ भूस्खलन का वीडियो
हरमल गांव के पास हुए भूस्खलन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि गांव को जोड़ने वाला पैदल मार्ग भारी मलबे और भूस्खलन की चपेट में आने के बाद पूरी तरह टूट गया है। ग्रामीणों का कहना है कि मोटर मार्ग बंद होने के कारण वे पहले ही परेशान थे और अब पैदल रास्ता भी क्षतिग्रस्त हो जाने से गांव का संपर्क लगभग कट गया है।
सुयालकोट के पास बंद पड़ा है देवाल-खेता मोटर मार्ग
क्षेत्र पंचायत सदस्य चोटिंग रमेश गढ़िया ने बताया कि सुयालकोट के समीप पहाड़ी से लगातार भूस्खलन होने के कारण देवाल-खेता मोटर मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बंद है। मार्ग बंद होने के बाद ग्रामीण वैकल्पिक पैदल रास्ते का इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन अब हरमल गांव के पास वही रास्ता भी भूस्खलन की भेंट चढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में पहाड़ों में सफर पहले ही जोखिम भरा होता है। ऐसे में संपर्क मार्ग टूटने से ग्रामीणों की समस्याएं कई गुना बढ़ गई हैं। गांव तक खाद्य सामग्री पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं और विद्युत आपूर्ति को लेकर भी लोगों में चिंता बनी हुई है।
आवागमन के संकट से जूझ रहे ग्रामीण
संपर्क मार्ग बाधित होने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बाजार से राशन और अन्य आवश्यक सामान लाना मुश्किल हो गया है। वहीं किसी के बीमार होने की स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना भी चुनौती बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है। यदि जल्द रास्ता बहाल नहीं किया गया तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
वर्षों से अधूरी है सड़क निर्माण की मांग
हरमल गांव के लोग लंबे समय से मोटर मार्ग निर्माण और बेहतर संपर्क सुविधा की मांग करते आ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण कार्य वर्षों से अधूरा पड़ा है, जिसके कारण हर बरसात में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इस बार स्थिति और भी गंभीर हो गई है क्योंकि मोटर मार्ग के साथ-साथ पैदल रास्ता भी क्षतिग्रस्त हो गया है। ऐसे में गांव के लोगों के सामने आवागमन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
प्रशासन से की त्वरित कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि आपदा की स्थिति को देखते हुए क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग को जल्द सुरक्षित तरीके से बहाल किया जाए। साथ ही गांव में खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ विद्युत व्यवस्था को भी सुचारु किया जाए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई है कि लंबे समय से लंबित मोटर मार्ग निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से निजात मिल सके।
सड़क ही है पहाड़ की जीवनरेखा
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ में सड़क सिर्फ आवागमन का साधन नहीं होती, बल्कि यह गांवों की जीवनरेखा होती है। सड़क और संपर्क मार्ग बंद होने का सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और दैनिक जीवन पर पड़ता है। ऐसे में हरमल गांव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाना बेहद जरूरी है, ताकि ग्रामीणों को हर बरसात में इस तरह की मुश्किलों का सामना न करना पड़े।







