नई दिल्ली: यूपीआई (UPI) भुगतान पर शुल्क लगाए जाने को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर चल रही चर्चाओं के बीच नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। एनपीसीआई ने कहा है कि आम उपभोक्ताओं के लिए 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। वहीं 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर निर्धारित शुल्क लागू होगा।
एनपीसीआई के अनुसार, यह शुल्क ग्राहकों से नहीं बल्कि संबंधित मर्चेंट यानी दुकानदार, व्यापारी या सेवा प्रदाता से लिया जाएगा। ऐसे में आम यूपीआई उपयोगकर्ताओं को अपनी जेब से कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होगा।
15 अक्टूबर से लागू होगा नया प्रावधान
जारी जानकारी के मुताबिक, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लागू किया जाएगा। यह शुल्क न्यूनतम 5 रुपये से शुरू होकर अधिकतम 300 रुपये तक होगा।
यदि कोई ग्राहक किसी दुकान, कंपनी या सेवा प्रदाता को 2,000 रुपये से अधिक का भुगतान करता है, तो संबंधित मर्चेंट को 0.4 प्रतिशत तक का शुल्क देना पड़ सकता है। हालांकि किसी भी ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क 300 रुपये से अधिक नहीं होगा।
ऐसे समझें चार्ज का गणित
नई व्यवस्था के तहत:
- 2,500 रुपये के भुगतान पर लगभग 10 रुपये का शुल्क बनेगा।
- 5,000 रुपये के भुगतान पर लगभग 20 रुपये का शुल्क लगेगा।
- 75,000 रुपये के भुगतान पर 300 रुपये का शुल्क बनेगा।
- 75,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर भी अधिकतम शुल्क 300 रुपये ही रहेगा।
कुछ सेवाओं पर सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट चार्ज
एनपीसीआई ने बताया कि रेलवे टिकट, टेलीकॉम सेवाएं, बीमा प्रीमियम, पेट्रोल-डीजल और अन्य ईंधन श्रेणी के भुगतानों पर 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन में केवल 5 रुपये का फ्लैट चार्ज लगेगा। यह शुल्क भी संबंधित मर्चेंट द्वारा वहन किया जाएगा।
दोस्त या रिश्तेदार को पैसे भेजने पर कोई शुल्क नहीं
एनपीसीआई ने साफ किया है कि व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) यूपीआई ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। यानी यदि आप अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को यूपीआई के माध्यम से पैसे भेजते हैं, तो राशि कितनी भी हो, उस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
सरकार ने भी स्पष्ट किया नियम
नए नोटिफिकेशन के अनुसार दो इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम ऐसे हैं जिन पर किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लगाया जा सकता। इनमें शामिल हैं:
- RuPay डेबिट कार्ड से किया गया भुगतान।
- 2,000 रुपये तक का यूपीआई लेनदेन।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी बैंक या पेमेंट सेवा प्रदाता इन माध्यमों से किए गए भुगतान पर किसी व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं वसूल सकता।
आम उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं
यूपीआई शुल्क को लेकर फैली भ्रम की स्थिति के बीच एनपीसीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि आम ग्राहकों के लिए यूपीआई का इस्तेमाल पहले की तरह आसान और मुफ्त बना रहेगा। नए नियमों का असर मुख्य रूप से बड़े मर्चेंट भुगतानों पर पड़ेगा, जबकि व्यक्ति-से-व्यक्ति लेनदेन और 2,000 रुपये तक के भुगतान पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।







