कड़ाके की ठंड के बीच अलर्ट मोड में आपदा प्रबंधन, शीतलहर से निपटने को पूरी तैयारी ।

देहरादून:

उत्तर भारत में इन दिनों कड़ाके की ठंड का प्रकोप जारी है। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हाल ही में हुई भारी बर्फबारी के चलते तापमान में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। बर्फबारी के बाद जहां पर्वतीय इलाकों में शीतलहर चल रही है, वहीं मैदानी क्षेत्रों में घना कोहरा छाया हुआ है। कोहरे की सफेद चादर ने ठिठुरन और बढ़ा दी है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में शीतलहर और संभावित आपदाओं से निपटने के लिए उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह सतर्क और तैयार नजर आ रहा है।

आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि शीतलहर को लेकर विभाग ने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को समय रहते दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए थे। एसीओ स्तर पर बैठक के साथ-साथ सचिव स्तर पर भी दो अहम बैठकें की जा चुकी हैं, जिनमें से एक बैठक स्वयं मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई। शासन और विभागीय स्तर पर आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तार से निर्देश दिए गए हैं।

9 जनवरी को कोल्ड वेव पर राज्य स्तरीय वर्कशॉप

आपदा सचिव ने जानकारी दी कि 9 जनवरी को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा शीतलहर (कोल्ड वेव) को लेकर एक विशेष वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्कशॉप में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न एजेंसियां भी हिस्सा लेंगी।

इस कार्यशाला में 200 से अधिक अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से भाग लेंगे, जबकि सभी जिलों के जिलाधिकारी, तहसील और ब्लॉक स्तर के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़ेंगे। वर्कशॉप के दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि आपदा की स्थिति में किस विभाग की क्या जिम्मेदारी होगी और किस तरह समन्वय के साथ काम किया जाना है।

बर्फबारी और सड़क बंद होने से निपटने की पूरी तैयारी

बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के दौरान आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि विभाग पूरी तरह से मुस्तैद है। जिन क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण सड़कों के बंद होने की आशंका रहती है, वहां पहले से ही जरूरी मशीनरी तैनात करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।

इसके साथ ही जिन इलाकों में सड़क संपर्क बाधित होने से रोजमर्रा की जरूरतों पर असर पड़ सकता है, वहां मार्च माह तक के लिए आवश्यक सामग्री का भंडारण कर लिया गया है। कुछ स्थानों पर जो समस्याएं सामने आई थीं, उनका समाधान भी कर दिया गया है।

गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था

आपदा प्रबंधन विभाग ने संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए गर्भवती महिलाओं का विशेष डेटाबेस भी तैयार किया है। इन महिलाओं को ऐसे सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है, जहां से नजदीकी चिकित्सा केंद्र तक त्वरित पहुंच सुनिश्चित हो सके। आपात स्थिति में उन्हें तत्काल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

ऑफ सीजन में भी जारी रहती हैं तैयारियां

आपदा सचिव ने बताया कि प्रदेश में 15 जून से 15 सितंबर तक मानसून सीजन रहता है, जिसके दौरान लगभग सभी विभाग आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहते हैं। वहीं 15 सितंबर से 15 जून तक के ऑफ सीजन में विभाग तैयारियों और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देता है। इस दौरान आम जनता को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाते हैं।

जनजागरण अभियान का बड़ा लक्ष्य

इस वर्ष जनजागरण अभियान के तहत लगभग 1 लाख 90 हजार लोगों को आपदाओं के प्रति जागरूक करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक करीब 40 हजार लोगों को जागरूक किया जा चुका है। कम्युनिकेशन के विभिन्न माध्यमों से प्रदेशवासियों तक जरूरी जानकारी पहुंचाई जा रही है।

सचिव ने बताया कि मार्च माह तक इन सभी 1 लाख 90 हजार लोगों को प्रशिक्षण देने का भी लक्ष्य है। नवंबर में जारी आदेशों के बाद से अब तक करीब 30 हजार लोगों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इस तरह वित्तीय वर्ष के अंत तक आपदा प्रबंधन विभाग लगभग 2 लाख 30 हजार लोगों को जागरूक करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

मॉक ड्रिल और नए SOP होंगे लॉन्च

आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा समय-समय पर अलग-अलग तरह की ट्रेनिंग और मॉक ड्रिल का आयोजन किया जा रहा है। हाल ही में एक मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी, जबकि मानसून सीजन की शुरुआत में भी बड़े स्तर पर प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल कराई जाती है।

इसके साथ ही आपदा प्रबंधन से जुड़े बिखरे हुए अभिलेखों को संकलित कर विभिन्न मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP) तैयार की जा रही हैं। 9 जनवरी को होने वाली वर्कशॉप में मॉक ड्रिल, बाढ़, कोल्ड वेव, एयर इवेक्युएशन समेत कई अहम विषयों से संबंधित SOP का लॉन्च किया जाएगा।

कुल मिलाकर, बढ़ती ठंड और संभावित आपदाओं को देखते हुए उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर चुका है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

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