हरिद्वार: वर्ष 2027 में प्रस्तावित हरिद्वार अर्धकुंभ मेले से पहले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में गुटबाजी और तेज होती नजर आ रही है। शुक्रवार देर शाम हरिद्वार के कनखल स्थित श्री पंचायती शंभू अटल अखाड़े में आयोजित बैठक में आठ अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने नई कार्यकारिणी का गठन करते हुए बहुमत होने का दावा किया। इस दौरान परिषद के नए पदाधिकारियों की भी घोषणा की गई।
बैठक में महानिर्वाणी अखाड़ा, निर्मल अखाड़ा, अटल अखाड़ा, श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा, नया अखाड़ा तथा तीनों बैरागी अखाड़ों—दिगंबर, निर्वाणी और निर्मोही—के साधु-संत शामिल हुए। बैठक में मौजूद संतों ने दावा किया कि 13 में से 8 अखाड़ों का समर्थन उन्हें प्राप्त है, जिसके आधार पर नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है।
नई कार्यकारिणी की घोषणा
नई कार्यकारिणी में महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष चुना गया। निर्मोही अखाड़े के श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज को महामंत्री, श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा के महंत दुर्गादास को उपाध्यक्ष, निर्मल अखाड़े के जसविंदर सिंह शास्त्री को कोषाध्यक्ष तथा दिगंबर अखाड़े के महंत वैष्णों दास महाराज को मंत्री बनाया गया।
इसके अलावा नया अखाड़े के श्रीमहंत भगतराम महाराज, महानिर्वाणी अखाड़े के मुरली दास महाराज और महंत ज्ञानदेव सिंह को संरक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई। वहीं महामंडलेश्वर करौली शंकर दास को मीडिया संयोजक और महंत संजय दास को राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया।
‘आठ अखाड़ों का समर्थन, बहुमत हमारे साथ’
नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि अखाड़ा परिषद का गठन बहुमत के आधार पर होता है और 13 में से 8 अखाड़ों ने उनका समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आगामी अर्धकुंभ समेत देशभर में होने वाले कुंभ मेलों और धार्मिक आयोजनों में परिषद सक्रिय भूमिका निभाएगी।
उन्होंने बताया कि दो दिन बाद प्रशासन के साथ बैठक प्रस्तावित है, जिसमें अर्धकुंभ की तैयारियों और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। बैठक के बाद सभी निर्णयों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
‘सरकार के साथ मिलकर होगी कुंभ की तैयारी’
नवनिर्वाचित मीडिया संयोजक करौली शंकर महाराज ने कहा कि देश के 13 अखाड़ों में से आठ अखाड़ों ने मिलकर अगले पांच वर्षों के लिए श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज को अध्यक्ष चुना है। उन्होंने कहा कि देश में जहां-जहां भी कुंभ मेलों का आयोजन होगा, वहां परिषद सरकार के साथ समन्वय बनाकर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने का कार्य करेगी।
पहले से मौजूद है दूसरी कार्यकारिणी
गौरतलब है कि 2027 हरिद्वार अर्धकुंभ से पहले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद को लेकर साधु-संतों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं। इससे पहले भी एक अलग कार्यकारिणी का गठन किया गया था, जिसमें निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज को अध्यक्ष और जूना अखाड़े के श्रीमहंत हरिगिरि महाराज को महामंत्री चुना गया था। उस पक्ष ने भी कई बार बहुमत होने का दावा किया है।
ऐसे में अब अखाड़ा परिषद स्पष्ट रूप से दो गुटों में बंटी हुई दिखाई दे रही है। 2027 के अर्धकुंभ मेले की तैयारियों के बीच परिषद के भीतर जारी यह खींचतान धार्मिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन किस कार्यकारिणी को आधिकारिक मान्यता देता है और अर्धकुंभ की तैयारियों में किसकी भूमिका प्रमुख रहती है।







