मसूरी: मसूरी के उप जिला चिकित्सालय में करीब एक साल के मासूम बच्चे की मौत के बाद अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। बच्चे की मौत से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। वहीं अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए समिति गठित कर दी है। घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि मामले ने अब राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है।
मां का आरोप- सुबह अस्पताल पहुंचे, लेकिन समय पर नहीं मिला इलाज
मृतक बच्चे की मां, जो बार्लोगंज क्षेत्र की निवासी हैं, ने आरोप लगाया कि सोमवार तड़के करीब पांच बजे वह अपने बीमार बच्चे को लेकर उप जिला चिकित्सालय पहुंची थीं। उस समय अस्पताल में न तो कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही तत्काल उपचार के लिए पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध था।
परिजनों का कहना है कि काफी देर तक गुहार लगाने के बाद डॉक्टर और अस्पताल कर्मी पहुंचे, लेकिन बच्चे का समुचित उपचार नहीं किया गया। उनका आरोप है कि उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया गया कि सुबह आठ बजे बच्चों के विशेषज्ञ चिकित्सक आएंगे। उनका कहना है कि यदि समय पर इलाज मिल जाता तो शायद बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अब तक नहीं दी गई कोई लिखित शिकायत
हालांकि, इस मामले में अब तक परिजनों की ओर से न तो अस्पताल प्रशासन को कोई लिखित शिकायत दी गई है और न ही मसूरी पुलिस में कोई तहरीर सौंपी गई है। फिलहाल मामला मीडिया में लगाए गए आरोपों और अस्पताल प्रशासन के जवाब तक ही सीमित है।
अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को बताया निराधार
उप जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. खजान सिंह चौहान ने परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराई गई।
उन्होंने बताया कि फुटेज में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि महिला के अस्पताल पहुंचते ही ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने तत्काल बच्चे को अटेंड किया। इसके कुछ ही समय बाद डॉक्टर भी मौके पर पहुंचे और बच्चे की जांच की।
पहले से चल रहा था बच्चे का इलाज
सीएमएस के अनुसार, परिजनों ने डॉक्टरों को बताया था कि बच्चे का पहले से इलाज चल रहा था और वह दवाइयां भी ले रहा था। जांच के बाद चिकित्सक ने कुछ पुरानी दवाइयां बंद कर नई दवाइयां लिखीं और परिजनों को सुबह बच्चों के विशेषज्ञ चिकित्सक को दोबारा दिखाने की सलाह दी थी।
डॉ. चौहान का कहना है कि प्रथम दृष्टया अस्पताल की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही सामने नहीं आई है, लेकिन पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं।
जांच समिति करेगी सभी पहलुओं की पड़ताल
अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी है। समिति चिकित्सा रिकॉर्ड, ड्यूटी चार्ट, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित कर्मचारियों के बयान सहित सभी तथ्यों की जांच करेगी।
सीएमएस ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में किसी डॉक्टर या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
घटना ने पकड़ा राजनीतिक रंग
मासूम बच्चे की मौत के बाद मामला राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है। घटना के बाद कुछ स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधि भी अस्पताल पहुंचे और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। हालांकि शहर के कई नागरिकों का कहना है कि इस संवेदनशील मामले को राजनीतिक रंग देने के बजाय निष्पक्ष जांच होने दी जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जांच में अस्पताल प्रशासन या किसी चिकित्सक की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो बिना तथ्यों के अस्पताल और चिकित्सकों की छवि धूमिल करना भी उचित नहीं होगा।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
मासूम बच्चे की मौत से परिजन गहरे सदमे में हैं, जबकि अस्पताल प्रशासन जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है। अब पूरे मामले में सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चे की मौत के पीछे चिकित्सा लापरवाही थी या अन्य कोई कारण। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।







