थराली: चमोली जिले के थराली में गर्भवती महिला की एंबुलेंस में हुई मौत का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ने लगा है। घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) थराली में जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं और स्थानीय लोगों ने कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार चिकित्साकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई, मामले की निष्पक्ष जांच और अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्काल नियुक्ति की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
सीएचसी थराली में कांग्रेस का धरना-प्रदर्शन
बुधवार को पूर्व विधायक डॉ. जीतराम, ब्लॉक प्रमुख प्रवीण पुरोहित और नगर पंचायत अध्यक्ष सुनीता रावत के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सीएचसी थराली पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अस्पताल परिसर में धरना दिया। उनका कहना था कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति के कारण लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है और सरकार इस ओर गंभीर नहीं है।
परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप
मृतक महिला के परिजनों का आरोप है कि कुराड़ गांव निवासी 35 वर्षीय सरिता देवी को प्रसव पीड़ा होने पर सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे सीएचसी थराली लाया गया था। उनका कहना है कि महिला की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन समय रहते उसे उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर नहीं किया गया। आरोप है कि जब स्थिति अत्यधिक गंभीर हो गई, तब दोपहर करीब 2 बजे उसे 108 एंबुलेंस से कर्णप्रयाग भेजा गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
परिजनों का कहना है कि यदि अस्पताल में समय पर उचित उपचार या विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होते, तो शायद महिला की जान बचाई जा सकती थी।
गायनोकोलॉजिस्ट नहीं होने पर किया गया था रेफर
जानकारी के अनुसार, सीएचसी थराली में स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनोकोलॉजिस्ट) उपलब्ध नहीं होने के कारण महिला को हायर सेंटर कर्णप्रयाग रेफर किया गया था। हालांकि, अस्पताल से निकलने के कुछ समय बाद ही महिला ने एंबुलेंस में दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी नाराजगी है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की मांग
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि थराली जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि अस्पताल में जल्द से जल्द गायनोकोलॉजिस्ट सहित अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी गर्भवती महिला को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
कांग्रेस की चेतावनी
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार नहीं हुआ, तो आंदोलन को जिला स्तर से राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा। फिलहाल प्रदर्शनकारी अस्पताल परिसर में धरने पर बैठे हैं और प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, सीमित संसाधन और रेफरल व्यवस्था की चुनौतियां लगातार लोगों की जान पर भारी पड़ रही हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।







