देहरादून: उत्तराखंड में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और इसके साथ ही पहाड़ों में आफत की बारिश का दौर भी शुरू हो गया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जगह-जगह भूस्खलन, सड़कें बंद होने और नदी-नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में फिलहाल 71 सड़कें बंद हैं, जबकि एक अप्रैल 2026 से अब तक बारिश और आपदा संबंधी घटनाओं में 20 लोगों की मौत हो चुकी है।
अगले 48 घंटे बेहद संवेदनशील, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने 9 जुलाई के लिए देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और चम्पावत जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में गरज-चमक के साथ अत्यधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है।
इसके अलावा टिहरी, पौड़ी, अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भी भारी वर्षा का अनुमान है।
मौसम विभाग के प्रमुख अलर्ट
- 8 जुलाई को 10 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी।
- 9 जुलाई को 5 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट।
- कई स्थानों पर बिजली चमकने और तेज बारिश की संभावना।
- 10 से 12 जुलाई तक पर्वतीय जिलों में भारी बारिश जारी रहने का अनुमान।
- 14 जुलाई तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।
पंतनगर में सबसे अधिक 113.8 मिमी बारिश
पिछले 24 घंटों में राज्य में औसतन 15.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। सबसे अधिक बारिश पंतनगर में 113.8 मिमी रिकॉर्ड की गई।
प्रमुख स्थानों पर दर्ज वर्षा
- पंतनगर – 113.8 मिमी
- भगवानपुर – 68.0 मिमी
- ऋषिकेश – 54.0 मिमी
- मुक्तेश्वर – 44.8 मिमी
- धनोल्टी – 44.0 मिमी
- नैनीताल – 43.0 मिमी
- चमोली – 36.4 मिमी
- टिहरी – 33.0 मिमी
- चम्पावत – 32.0 मिमी
- लोहाघाट – 31.8 मिमी
बारिश ने बढ़ाई आपदाएं, 20 लोगों की गई जान
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से अब तक प्रदेश में बारिश और अन्य आपदा संबंधी घटनाओं में 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 23 लोग घायल हुए हैं।
इसके अलावा—
- 9 पशुओं की मौत।
- 670 छोटे पशुओं की हानि।
- 7 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त।
- अल्मोड़ा, चमोली, नैनीताल, पौड़ी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और टिहरी सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल।
प्रदेश में 71 सड़कें बंद, चमोली सबसे ज्यादा प्रभावित
लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेशभर में सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। SEOC के अनुसार इस समय 71 सड़कें बंद हैं।
इनमें शामिल हैं—
- 2 स्टेट हाईवे
- 1 बीआरओ सड़क
- 16 लोक निर्माण विभाग (PWD) की सड़कें
- 52 ग्रामीण एवं पीएमजीएसवाई सड़कें
जिलेवार बंद सड़कें
- चमोली – 19
- पिथौरागढ़ – 15
- बागेश्वर – 11
- नैनीताल – 6
- टिहरी – 6
- देहरादून – 5
- रुद्रप्रयाग – 3
- पौड़ी – 3
- चम्पावत – 2
- अल्मोड़ा – 1
संबंधित विभाग बंद मार्गों को खोलने के लिए लगातार मशीनें लगाकर काम कर रहे हैं।
खराब मौसम के बावजूद जारी है चारधाम यात्रा
बारिश और भूस्खलन की आशंकाओं के बीच भी चारधाम यात्रा जारी है। अब तक लाखों श्रद्धालु धामों में दर्शन कर चुके हैं।
चारधाम यात्रा का आंकड़ा
- बदरीनाथ धाम – 14,58,572 श्रद्धालु
- केदारनाथ धाम – 13,93,964 श्रद्धालु
- गंगोत्री धाम – 6,85,111 श्रद्धालु
- यमुनोत्री धाम – 6,37,331 श्रद्धालु
- हेमकुंड साहिब – 1,82,461 श्रद्धालु
प्रशासन ने यात्रा मार्गों पर अतिरिक्त निगरानी बढ़ा दी है और यात्रियों को मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा शुरू करने की सलाह दी है।
प्रमुख नदियां फिलहाल खतरे के निशान से नीचे
लगातार बारिश के बावजूद प्रदेश की प्रमुख नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, हालांकि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
प्रमुख नदियों का जलस्तर
- गंगा (हरिद्वार) – 291.15 मीटर
- अलकनंदा (श्रीनगर) – 532.75 मीटर
- अलकनंदा (रुद्रप्रयाग) – 623.20 मीटर
- पिंडर (कर्णप्रयाग) – 768.20 मीटर
- काली नदी (धारचूला) – 888.40 मीटर
प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों और यात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
प्रशासन हाई अलर्ट पर, लोगों से सावधानी बरतने की अपील
मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए राज्य सरकार, जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग को हाई अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील इलाकों में मशीनरी और राहत दल तैनात किए गए हैं तथा बंद सड़कों को खोलने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों के किनारे न जाएं और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। विशेष रूप से चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से कहा गया है कि यात्रा शुरू करने से पहले मौसम और मार्ग की ताजा जानकारी अवश्य लें।
प्रदेश में मानसून अभी शुरुआती चरण में है और मौसम विभाग के अनुसार आने वाले कई दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। ऐसे में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।






