पिथौरागढ़: सीमांत जिला पिथौरागढ़, जो प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गृह जनपद भी है, वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले के सबसे बड़े बीडी पांडे जिला अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच संसाधनों की भारी कमी सामने आई है। हालात ऐसे हैं कि अस्पताल में बेड कम पड़ने के कारण एक ही बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज किया जा रहा है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है और अस्पताल की व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।
अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़, बेड पड़े कम
मौसमी बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के चलते इन दिनों जिला अस्पताल की ओपीडी और इनडोर वार्ड मरीजों से खचाखच भरे हुए हैं। स्थिति यह है कि वार्डों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। बेड कम पड़ने पर अस्पताल प्रशासन एक ही बेड पर दो मरीजों को भर्ती करने को मजबूर है।
मरीजों के परिजनों का कहना है कि इस व्यवस्था से मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। उनका कहना है कि मरीज ठीक होने के बजाय नई बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।
नेपाल और तीन जिलों का भी यही सहारा
पिथौरागढ़ जिला अस्पताल केवल जिले के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ बागेश्वर और चंपावत जिलों के मरीजों के लिए भी प्रमुख उपचार केंद्र है। वहीं जिले के बेरीनाग, गंगोलीहाट, धारचूला, मुनस्यारी और डीडीहाट के अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने के कारण अधिकांश मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। ऐसे में पूरे जनपद का भार अकेले बीडी पांडे जिला अस्पताल पर आ गया है।
चेस्ट फिजीशियन के न होने से बढ़ी परेशानी
अस्पताल में तैनात एकमात्र चेस्ट फिजीशियन की ड्यूटी चारधाम यात्रा में लगाए जाने से सांस और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों के मरीजों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छाती में दर्द और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों को डॉक्टर उपलब्ध नहीं मिल रहे हैं। कई मरीज इमरजेंसी में प्राथमिक जांच कराने के बाद बिना विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लिए ही घर लौटने को मजबूर हैं।
अस्पताल प्रशासन ने बताई मजबूरी
जिला चिकित्सालय के पीएमएस डॉ. डीपी सिंह ने कहा कि अस्पताल में आने वाले किसी भी मरीज को वापस नहीं भेजा जा सकता। उनका कहना है कि उपलब्ध संसाधनों के बीच हर मरीज को उपचार देने की पूरी कोशिश की जा रही है।
“उपचार के लिए पहुंचने वाले किसी भी मरीज को वापस नहीं भेजा जा सकता। हर मरीज को इलाज की सुविधा मिले, यही हमारी कोशिश रहती है।”
— डॉ. डीपी सिंह, पीएमएस, जिला चिकित्सालय पिथौरागढ़
स्वास्थ्य व्यवस्था पर विपक्ष का हमला
महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष नंदा बिष्ट ने जिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्था पर सरकार को घेरते हुए कहा कि पूरे पिथौरागढ़ जिले की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा चुकी हैं। उनका आरोप है कि समय पर इलाज और पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलने से लोगों की जान तक जा रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं में जल्द सुधार नहीं किया गया तो कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर आंदोलन करेगी।
संसाधनों की कमी बनी बड़ी चुनौती
क्षमता से कई गुना अधिक मरीजों के पहुंचने और डॉक्टरों, स्टाफ व बेड की कमी के कारण जिला अस्पताल की व्यवस्था लगातार दबाव में है। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल में सबसे बड़ी चुनौती इलाज नहीं, बल्कि मरीज को भर्ती करने के लिए बेड उपलब्ध कराना बन गया है।
लगातार बिगड़ती व्यवस्थाओं ने सीमांत जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़ती आबादी और मरीजों की संख्या को देखते हुए जिला अस्पताल में बेड, डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का जल्द विस्तार किया जाना आवश्यक है, ताकि मरीजों को बेहतर और समय पर उपचार मिल सके।







