मसूरी: पहाड़ों की रानी मसूरी में लगातार हो रही बारिश अब लोगों के लिए डर का कारण बनती जा रही है। सोमवार देर रात जेपी बैंड क्षेत्र में हुए मलबा बहाव ने स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी। पहाड़ी से तेज़ी से बहकर आया भारी मलबा सीधे लोक निर्माण विभाग (PWD) के आवासों में घुस गया, जिससे कई घर मिट्टी और पत्थरों से भर गए। इस हादसे में एक ही परिवार के सात सदस्य बाल-बाल बच गए, जबकि घर का अधिकांश सामान मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गया।
सोते हुए परिवार पर टूटा कहर
जानकारी के अनुसार, देर रात अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। इसी दौरान तेज बारिश के बीच पहाड़ी से अचानक मलबे का तेज बहाव शुरू हुआ। कुछ ही मिनटों में मिट्टी, पत्थर और बड़े-बड़े बोल्डर पीडब्ल्यूडी आवासों तक पहुंच गए और कई कमरों में कई फीट तक मलबा भर गया।
सबसे गंभीर स्थिति उस परिवार की रही, जहां दंपति अपने पांच बच्चों के साथ घर में मौजूद था। अचानक घर में मलबा घुसने से अफरा-तफरी मच गई। परिवार के सभी सदस्यों ने किसी तरह बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कुछ मिनट और देर हो जाती, तो यह हादसा बड़ी जनहानि में बदल सकता था।
स्थानीय लोगों ने लगाए ‘मानव निर्मित आपदा’ के आरोप
घटना के बाद प्रभावित परिवारों और स्थानीय निवासियों ने केवल भारी बारिश को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। उनका आरोप है कि जेपी बैंड के ऊपरी हिस्से में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहे हैं और वहां से निकला मलबा नियमों के विपरीत पहाड़ी ढलानों, जंगलों और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों में डंप किया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों पुराने प्राकृतिक नालों को भी कई स्थानों पर बाधित कर दिया गया है। बारिश के दौरान यही मलबा पानी के साथ बहकर नीचे रिहायशी क्षेत्रों में पहुंचा और नुकसान का कारण बना।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इस संबंध में पहले से शिकायतें की जा रही थीं, तो संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।
फिर उठे निर्माण कार्यों की निगरानी पर सवाल
मसूरी में पिछले कुछ वर्षों से लगातार भूस्खलन, सड़क धंसने और मलबा बहने की घटनाएं सामने आती रही हैं। हाल ही में पानी वाले मोड़ पर सड़क धंसने की घटना के बाद अब जेपी बैंड का यह मामला पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की निगरानी और मलबा निस्तारण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि निर्माण कार्यों से निकले मलबे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं किया जाता, तो बारिश के दौरान यही मलबा नीचे बसे लोगों के लिए “मलबा बम” बनकर जानलेवा साबित हो सकता है।
प्रशासन और पालिका ने लिया संज्ञान
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय सभासद शिवानी भारती मौके पर पहुंचीं और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्यों की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी और एसडीएम राहुल आनंद ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजा। प्रशासन ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है और प्रभावित परिवारों को हर संभव राहत उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
जांच के बाद ही होगी जिम्मेदारी तय
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है। स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्यों और मलबा निस्तारण को हादसे की वजह बताया है, लेकिन इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना केवल भारी बारिश का परिणाम थी या निर्माण कार्यों में लापरवाही ने भी इसमें भूमिका निभाई।







