हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। चोरगलिया थाना क्षेत्र के गौलापार स्थित मानपुर पश्चिम गांव में घर के भीतर बनी पानी की टंकी कुछ ही मिनटों में मौत का कुआं बन गई। पहले बड़ा बेटा टंकी में उतरा, फिर उसे बचाने छोटा भाई गया और आखिर में दोनों बेटों को बचाने के लिए मां भी टंकी में उतर गई। लेकिन तीनों जिंदा बाहर नहीं लौट सके। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।
नई पानी की टंकी बनी मौत का कारण
जानकारी के अनुसार, परिवार ने हाल ही में घर में नई पानी की टंकी का निर्माण कराया था। टंकी की शटरिंग (ढोला) खोलने के लिए सबसे पहले धर्मेंद्र उर्फ धर्म सिंह बिष्ट अंदर उतरे। आशंका है कि टंकी के भीतर ऑक्सीजन की कमी या जहरीली गैस होने के कारण वह बेहोश हो गए।
काफी देर तक जब वह बाहर नहीं आए तो उन्हें देखने उनके छोटे भाई खुशाल सिंह बिष्ट टंकी में उतर गए। लेकिन वह भी जहरीली हवा की चपेट में आकर बेहोश हो गए।
अपने दोनों बेटों को बचाने की कोशिश में मां सरस्वती देवी भी बिना कुछ सोचे-समझे टंकी में उतर गईं, लेकिन वह भी बाहर नहीं निकल सकीं। देखते ही देखते एक ही परिवार के तीन सदस्य टंकी के भीतर बेहोश हो गए।
बचाने गया सब्जी विक्रेता भी हुआ बेहोश
इसी दौरान सब्जी विक्रेता भोजराज घर लौट रहे थे। चीख-पुकार सुनकर वह मौके पर पहुंचे और बिना अपनी जान की परवाह किए टंकी में उतर गए। उन्होंने तीनों के सिर ऊपर करने की कोशिश की ताकि उनकी सांस चल सके, लेकिन टंकी के भीतर घुटन और जहरीली गैस इतनी अधिक थी कि वह भी बेहोश हो गए।
इसके बाद राजेंद्र सिंह मेहरा टंकी में उतरे। ग्रामीणों ने रस्सी की मदद से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। बाद में सभी को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने सरस्वती देवी, धर्म सिंह और खुशाल सिंह को मृत घोषित कर दिया।
मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता और दादी का साया
इस हादसे ने परिवार के छोटे-छोटे बच्चों का जीवन बदलकर रख दिया। पड़ोसियों के अनुसार परिवार में चार से सात वर्ष की उम्र के कई मासूम बच्चे हैं। एक ही हादसे में उनके सिर से पिता और दादी का साया उठ गया।
ग्रामीणों ने सरकार से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने और बच्चों की शिक्षा एवं भविष्य की जिम्मेदारी उठाने की मांग की है।
12 साल पहले भी परिवार पर टूटा था दुखों का पहाड़
यह परिवार पहले भी एक बड़ी त्रासदी झेल चुका है। करीब 12 वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में धर्म सिंह और खुशाल सिंह के पिता भीम सिंह की मौत हो गई थी।
पति की मृत्यु के बाद सरस्वती देवी ने संघर्ष कर दोनों बेटों को बड़ा किया। धर्म सिंह प्लंबर का काम करते थे, जबकि खुशाल सिंह एक निजी कंपनी में इलेक्ट्रिशियन थे। दोनों ही परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा थे। अब मां और दोनों बेटों की एक साथ मौत से परिवार गहरे आर्थिक और भावनात्मक संकट में आ गया है।
नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने तीनों के शव परिजनों को सौंप दिए। दोपहर बाद शवों को घर लाया गया, जहां पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। इसके बाद चोरगलिया स्थित सूर्या देवी मंदिर के पास जामवाला घाट में तीनों का अंतिम संस्कार किया गया।
अजन्मे बच्चे ने जन्म से पहले खो दिया पिता
इस हादसे का सबसे मार्मिक पहलू यह है कि मृतक खुशाल सिंह की पत्नी छह माह की गर्भवती हैं। परिवार में तीन महीने बाद नई खुशियां आने वाली थीं, लेकिन उससे पहले ही अजन्मे बच्चे ने अपने पिता को खो दिया।
पति की मौत के सदमे से खुशाल की पत्नी बेसुध है और पूरा परिवार भविष्य की चिंता में डूबा हुआ है।
प्रशासन ने शुरू की जांच
एसडीएम मोनिका ने बताया कि प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में टंकी के भीतर ऑक्सीजन की कमी या जहरीली गैस बनने की आशंका जताई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
पूरे गांव में मातम, सहायता की मांग
मानपुर पश्चिम गांव में इस घटना के बाद हर घर में मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई हादसे देखे हैं, लेकिन एक मां को अपने बेटों को बचाने के लिए मौत के मुंह में उतरते और पूरे परिवार को एक साथ खत्म होते पहली बार देखा है।
ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि पीड़ित परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता दी जाए, मासूम बच्चों की शिक्षा और पालन-पोषण की जिम्मेदारी सरकार उठाए और भविष्य में ऐसे हादसों से बचाव के लिए निर्माणाधीन टंकियों व बंद स्थानों में सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाए।







