हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ मेले की रौनक अब अपने चरम पर पहुंच चुकी है। देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगाजल लेने हरिद्वार पहुंच रहे हैं। बुधवार शाम तक हरिद्वार आने वाले कांवड़ियों की संख्या 1 करोड़ 80 लाख के पार पहुंच गई। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं।
गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के बीच श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए इस बार विशेष रूप से वाटर एम्बुलेंस (लाइफ बोट) तैनात की गई है। **एसडीआरएफ, जल पुलिस और आपदा मित्र मिलकर घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, अब तक वाटर एम्बुलेंस की मदद से 25 से 30 कांवड़ियों की जान बचाई जा चुकी है।
कैसे काम करती है वाटर एम्बुलेंस?
कांवड़ मेले में तैनात लाइफ बोट को ही वाटर एम्बुलेंस का रूप दिया गया है। गंगा किनारे इन बोटों को तैयार रखा गया है, जिन पर एसडीआरएफ, जल पुलिस और आपदा मित्रों की टीमें तैनात हैं। जैसे ही कोई श्रद्धालु गंगा में डूबने लगता है या उसकी हालत गंभीर होती है, उसे तुरंत बोट में बैठाकर जिला अस्पताल के नजदीकी घाट तक पहुंचाया जाता है। वहां पहले से मौजूद एम्बुलेंस के जरिए मरीज को तत्काल जिला अस्पताल भेज दिया जाता है।
एसडीआरएफ इंस्पेक्टर कवीन्द्र सजवाण ने बताया कि हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों पर किसी श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने पर सड़क मार्ग से अस्पताल पहुंचाना भीड़ के कारण काफी मुश्किल हो जाता है। इसलिए पहले श्रद्धालुओं को घाटों पर लगाए गए स्वास्थ्य शिविरों में प्राथमिक उपचार दिया जाता है। यदि डॉक्टर तत्काल अस्पताल भेजने की सलाह देते हैं, तो उन्हें वाटर एम्बुलेंस से सीधे ओम घाट तक पहुंचाया जाता है, जहां से एम्बुलेंस उन्हें कुछ ही मिनटों में जिला अस्पताल पहुंचा देती है।
क्यों है यह व्यवस्था बेहद जरूरी?
प्रशासन ने कांवड़ मेले को लेकर व्यापक तैयारी की है। गंगा घाटों पर कई स्थानों पर वाटर एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। कांगड़ा घाट और सीसीआर घाट को सबसे संवेदनशील क्षेत्र माना गया है। यहां तेज बहाव के बीच डूबते श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती बन जाता है।
अधिकारियों के अनुसार, कई कांवड़िए बिना सुरक्षा के गंगा के बीच तक चले जाते हैं, जिससे डूबने का खतरा बढ़ जाता है। दूसरी बड़ी चुनौती हाईवे और आंतरिक मार्गों पर भारी भीड़ है, जिसके कारण आपात स्थिति में एम्बुलेंस को तेजी से निकालना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से क्विक रिस्पांस के लिए वाटर एम्बुलेंस व्यवस्था लागू की गई है।
24 घंटे तैनात हैं रेस्क्यू टीमें
ईटीवी भारत से बातचीत में एसडीआरएफ इंस्पेक्टर कवीन्द्र सजवाण ने बताया, *“कां“कांवड़ मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए वाटर एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। जल पुलिस, आपदा मित्र और एसडीआरएफ की टीमें मिलकर डूबते कांवड़ियों का रेस्क्यू कर रही हैं। अभी तक 25 से 30 श्रद्धालुओं की जान बचाई जा चुकी है। आने वाले दिनों में भीड़ और बढ़ेगी, इसलिए हमारी टीमें 24 घंटे घाटों पर तैनात हैं। प्रयास है कि कम से कम समय में पहुंचकर श्रद्धालुओं की जान बचाई जा सके।”
कांवड़ मेले में बढ़ती भीड़ के बीच प्रशासन श्रद्धालुओं से अपील कर रहा है कि वे गंगा में निर्धारित क्षेत्रों में ही स्नान करें, सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और तेज बहाव वाले हिस्सों में जाने से बचें। हरिद्वार में आस्था और सुरक्षा दोनों को साथ लेकर प्रशासन पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है।







