मसूरी: पहाड़ों की रानी मसूरी को वर्ष 2054 तक पेयजल संकट से राहत दिलाने के उद्देश्य से बनाई गई करीब 144 करोड़ रुपये की यमुना पेयजल पंपिंग योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शुक्रवार को मसूरी-कैंपटी रोड पर सैंजी गांव के पास योजना की मुख्य पाइप लाइन का जोड़ खुलने से पाइप फट गई और तेज दबाव के साथ पानी सड़क पर फूट पड़ा।
घटना के बाद कुछ ही मिनटों में सड़क पर पानी का तेज फव्वारा निकलने लगा। देखते ही देखते सड़क का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और हजारों लीटर पानी बहकर बर्बाद हो गया। सड़क पर फव्वारे की तरह निकल रही पानी की धार ने राहगीरों और पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
कई पर्यटक इस दृश्य को प्राकृतिक झरना समझकर उसके साथ फोटो और सेल्फी लेते नजर आए। लोगों ने मौके पर रुककर वीडियो भी बनाए, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने इस घटना को सरकारी लापरवाही और जनता के पैसे की बर्बादी करार दिया। उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब यमुना पेयजल योजना की पाइप लाइन में इस तरह की खराबी सामने आई हो। आरोप है कि योजना शुरू होने के बाद से कई बार सड़क के नीचे बिछी पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हुई है, जिससे लाखों लीटर पेयजल व्यर्थ बहा और सड़कें भी बार-बार टूटती रही हैं।
लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजना में यदि बार-बार तकनीकी खराबियां सामने आ रही हैं, तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
उधर, जल निगम के सहायक अभियंता बी. निराला ने बताया कि पाइप का जोड़ खुलने के कारण पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हुई। उन्होंने कहा, *“कंट्रोल रूम को लीकेज की सूचना मिलते ही त“कंट्रोल रूम को लीकेज की सूचना मिलते ही तत्काल पंपिंग बंद कर दी गई, जिससे पानी का दबाव कम किया जा सका। विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया।”
उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह तक पाइप लाइन की मरम्मत पूरी कर ली गई और जलापूर्ति व्यवस्था सामान्य कर दी गई है।
गौरतलब है कि यमुना पेयजल पंपिंग योजना को मसूरी की बढ़ती आबादी और पर्यटन सीजन में पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस योजना से भविष्य में शहर को दीर्घकालिक पेयजल राहत मिलने की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि, बार-बार सामने आ रही तकनीकी खामियों ने योजना की गुणवत्ता, रखरखाव और निगरानी व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते योजना की तकनीकी समीक्षा नहीं की गई, तो भविष्य में और बड़े नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।







