लक्सर: जिस आंगन में कुछ दिन पहले तक बच्चों की किलकारियां और परिवार की खुशियां गूंज रही थीं, शनिवार को वहां मातम का सन्नाटा पसरा था। पौड़ी के दर्दनाक सड़क हादसे ने लक्सर के एक परिवार को ऐसा घाव दिया है, जिसे शायद समय भी भर नहीं पाएगा। सुबह से शुरू हुआ शवों के पहुंचने का सिलसिला जब एक ही परिवार के छह सदस्यों तक पहुंचा, तो गांव की गलियों में चीख-पुकार और मातम का माहौल छा गया।
सबसे पहले शनिवार सुबह अरमान, उनकी मां शब्बो और अनाभिया के शव गांव पहुंचे। तीन शवों को देखकर ही परिजनों का कलेजा फट पड़ा। महिलाएं बिलख-बिलख कर रोने लगीं और घर में कोहराम मच गया। लेकिन दुख यहीं नहीं थमा। करीब चार घंटे बाद **अफजल, उसकेअफजल, उसके बेटे अमन और भाई गुफरान के शव भी गांव पहुंचे, जिससे मातम और गहरा गया।
एक ही परिवार के छह सदस्यों के शव सामने देखकर परिजनों का सब्र टूट गया। घर में मौजूद महिलाओं की चीखें दूर तक सुनाई दे रही थीं। रिश्तेदार और पड़ोसी उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन खुद भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे।
शवों के गांव पहुंचते ही घर के बाहर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। कोई परिजनों को ढांढस बंधा रहा था तो कोई गम में खामोश खड़ा था। जिस घर में कुछ दिन पहले तक हंसी-खुशी का माहौल था, वहां शनिवार को एक साथ छह जनाजों की तैयारी हो रही थी।
धार्मिक रीति-रिवाज पूरे होने के बाद जब छह जनाजे एक साथ घर से निकले तो गांव की गलियां लोगों से भर गईं। अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। जिसने भी यह मंजर देखा, उसकी आंखें नम हो गईं।
जनाजों के साथ चल रही भीड़ लगातार बढ़ती गई। हर कोई इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध था। गांव में एक तरफ सन्नाटा था तो दूसरी तरफ अपनों को खोने का असहनीय दर्द।
भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। अंतिम यात्रा के मार्ग पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई और यातायात व्यवस्था को नियंत्रित किया गया। प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।
छह मृतकों की अंतिम विदाई में **आजाद समाज आजाद समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता इकबाल अंसारी, लक्सर विधायक मोहम्मद शहजाद, सलीम, रहमान, कुर्बान, जुल्फिकार, अजय वर्मा, साधुराम वर्मा और रशीद सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
अंतिम यात्रा में शामिल लोगों की जुबां पर बस एक ही सवाल था—**एक ही परिवार पर इतनी बएक ही परिवार पर इतनी बड़ी त्रासदी क्यों टूटी? गांव में हर आंख नम थी, हर चेहरा गमगीन था और हर दिल इस दर्दनाक हादसे से बोझिल दिखाई दिया।







