चमोली: विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना की मायापुर टनल में हुआ हादसा बेहद भयावह साबित हुआ। देखते ही देखते टनल में मलबे के साथ पानी का तेज सैलाब घुस गया, जिससे अंदर काम कर रहे 22 श्रमिक फंस गए। हादसे के बाद शुरू किए गए राहत एवं बचाव अभियान में अब तक 19 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है, जबकि प्रशासन ने सात लोगों की मौत की पुष्टि की है। तीन श्रमिक अब भी लापता हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
टनल के भीतर करीब पांच फीट तक पानी भरा होने के बावजूद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आईटीबीपी के जवान लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। पानी और मलबे के बीच लापता श्रमिकों की तलाश करना बचाव दल के लिए बेहद कठिन चुनौती बन गया है। इसके बावजूद जवान अपनी जान जोखिम में डालकर टनल के अंदर लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।
हादसे के बाद टनल के अंदर का मंजर बेहद डरावना बना हुआ है। तेज बहाव, कीचड़ और जगह-जगह जमा मलबा रेस्क्यू अभियान में बाधा पैदा कर रहा है। कई स्थानों पर मशीनों के साथ मैनुअल सर्च भी किया जा रहा है, ताकि लापता श्रमिकों तक पहुंचा जा सके।
हादसे में घायल 14 लोगों का जिला अस्पताल गोपेश्वर में उपचार चल रहा है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। वहीं, प्रशासन और परियोजना प्रबंधन की ओर से राहत कार्य जारी है।
टनल के अंदर से सामने आ रही तस्वीरें हादसे की भयावहता और बचाव दल के जवानों के साहस को बयां कर रही हैं। पानी और मलबे के बीच काम कर रहे जवान लगातार अंदर तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि लापता तीनों श्रमिकों का पता लगाया जा सके।
विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना की टनल में हुए इस हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है। स्थानीय लोगों में हादसे को लेकर गहरा आक्रोश और चिंता भी देखने को मिल रही है। लोगों ने परियोजना में सुरक्षा इंतजामों की जांच की मांग उठाई है।
फिलहाल सभी की निगाहें टनल के भीतर चल रहे रेस्क्यू अभियान पर टिकी हैं। प्रशासन का कहना है कि लापता श्रमिकों की तलाश के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा और हर संभव प्रयास किया जा रहा है।







