डोईवाला (देहरादून): देहरादून-ऋषिकेश सिक्स लेन परियोजना के तहत प्रस्तावित करीब 3 हजार पेड़ों के कटान पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सात मोड़ क्षेत्र में पेड़ कटान स्थगित किए जाने की जानकारी दी। इस फैसले के बाद पर्यावरण संरक्षण की मांग कर रहे लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल स्थगन (स्टे) है, अंतिम फैसला नहीं। इसलिए उनकी लड़ाई अभी जारी रहेगी।
9 दिन के आंदोलन के बाद मिला राहत का फैसला
पेड़ कटान के विरोध में पिछले कई दिनों से सात मोड़ क्षेत्र में पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक संगठन और स्थानीय लोग प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि नौ दिन तक चले आंदोलन के बाद सरकार ने पेड़ों के कटान पर रोक लगाने का निर्णय लिया, जिसे वे अपनी बड़ी जीत मान रहे हैं।
‘फैसला रुका नहीं, सिर्फ स्थगित हुआ है’
प्रदर्शन में शामिल युवती मेघा ने कहा कि पेड़ कटान को पूरी तरह निरस्त नहीं किया गया है, बल्कि फिलहाल स्थगित किया गया है। ऐसे में आगे की रणनीति तैयार करने की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी सात मोड़ क्षेत्र से गुजर रहे थे, तब प्रदर्शनकारियों ने उन्हें रोककर पूरे मामले की जानकारी दी थी। मेघा के अनुसार, राहुल गांधी ने इस मुद्दे को संसद में उठाने का आश्वासन दिया था और इसके अगले ही दिन मुख्यमंत्री ने पेड़ कटान पर रोक की घोषणा की।
एलिवेटेड रोड बनाने की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण विकास के लिए जरूरी हो सकता है, लेकिन इसे ऐसे तरीके से किया जाना चाहिए जिससे कम से कम पेड़ काटने पड़ें।
प्रदर्शनकारी शालू ने कहा कि यदि इस परियोजना में एलिवेटेड सड़क बनाई जाए तो बड़ी संख्या में पेड़ों को बचाया जा सकता है और पर्यावरणीय नुकसान भी कम होगा।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य विकास का विरोध करना नहीं, बल्कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना है।
‘700 से ज्यादा पेड़ पहले ही कट चुके’
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल ने दावा किया कि अब तक 700 से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि करीब डेढ़ वर्ष पहले ही उन्हें सात मोड़ क्षेत्र में प्रस्तावित पेड़ कटान की जानकारी मिल गई थी, जिसके बाद पर्यावरण प्रेमियों ने पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें बचाने का अभियान शुरू किया था।
उन्होंने कहा कि पेड़ केवल लकड़ी नहीं हैं, बल्कि एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं। एक पेड़ पर पक्षी, कीट-पतंगे और कई अन्य जीव निर्भर रहते हैं। खासकर बरसात का समय पक्षियों के प्रजनन का मौसम होता है, ऐसे समय में पेड़ काटना पर्यावरण के लिए गंभीर नुकसान है।
स्थानीय लोगों को दिया जीत का श्रेय
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस आंदोलन को सफल बनाने में स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने हर परिस्थिति में आंदोलनकारियों का साथ दिया। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि उत्तराखंड देवभूमि है, जहां प्रकृति और जंगलों की पूजा की जाती है। इसलिए विकास के नाम पर हरियाली का नुकसान स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हाथी कॉरिडोर पर भी जताई चिंता
गौरतलब है कि ऋषिकेश-भानियावाला सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए करीब 3,300 पेड़ों को चिन्हित किया गया था। यह क्षेत्र एक महत्वपूर्ण एलीफेंट कॉरिडोर भी माना जाता है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि बड़े पैमाने पर पेड़ कटान और सड़क चौड़ीकरण से हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों की आवाजाही और प्राकृतिक आवास प्रभावित होंगे।
कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि विरोध के बावजूद पेड़ों की कटाई जारी थी, लेकिन इस मुद्दे के राष्ट्रीय स्तर पर उठने के बाद सरकार को फिलहाल कटान रोकने का फैसला लेना पड़ा। उनका कहना है कि अब अगली रणनीति इस दिशा में होगी कि परियोजना का ऐसा विकल्प निकले, जिससे सड़क का निर्माण भी हो और अधिकतम पेड़ों व वन्यजीवों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके।







